बिहार के विधानसभा चुनावों में अपने रणनीतिक कौशल से प्रधानमंत्री मोदी को भी मात देने वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का कद लगातार बढ़ता जा रहा है। यही कारण है कि उन्हें अब अगले लोकसभा चुनावों के लिए विपक्ष की ओर से प्रधानमंत्री पद का भी स्वभाविक उम्मीदवार माना जाने लगा है।
हालांकि अगले लोकसभा चुनावों में अभी तीन साल का लंबा समय बाकी है, लेकिन विपक्षी नेताओं की ओर से नीतीश के पक्ष में मोर्चाबंदी तेज कर दी गई है।
महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और केन्द्र की राजनीति में खासा दखल रखने वाले एनसीपी नेता शरद पवार ने तो एक दिन पूर्व उन्हें अगले आम चुनावों के लिए पीएम पद का उम्मीदवार घोषित भी कर दिया था। हालांकि एक दिन बाद ही वह अपने बयान से पलटते भी नजर आए, लेकिन इतना जरूर कहा कि नीतीश को हल्के में नहीं लिया जा सकता।
एक दिन पहले इकॉनोमिक टाइम्स अखबार को दिए इंटरव्यू में शरद पवार ने कहा था कि बिहार में जिस तरह से नीतीश ने भाजपा को मात दी है उससे वह स्वभाविक रूप से विपक्ष के लिए प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार हो सकते हैं।
पवार का तर्क, विपक्षी दलों को एकजुट कर सकते हैं नीतीश
आज अगर देश में विपक्ष को एकजुट होना है और भाजपा को मात देनी है तो नीतीश को ही चुनना बेहतर विकल्प होगा। शरद ने कहा था कि कांग्रेस के पास आज ऐसा कोई नेता नहीं है जो मोदी का मुकाबला कर सके।
हालांकि उन्होंने राहुल गांधी के मुकाबले सोनिया को ही बेहतर माना। नीतीश पर दिए उनके इस बयान पर जैसे ही राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हुआ राजनीति के घाघ खिलाड़ी शरद पवार ने तुरंत बयान से यू टर्न ले लिया।
संसद परिसर में पत्रकारों ने इस संबंध में सवाल दागा तो बोले अभी चुनावों में तीन साल का समय शेष है इसलिए इस तरह के कयास लगाना ठीक नहीं है। हालांकि ये जरूर कहा कि नीतीश ने अपने राज्य में अपनी काबिलियत का लोहा तो मनवाया है। इसलिए वह मजबूत दावेदार हो सकते हैं।
वहीं शरद पवार की उछाली इस गुगली पर राजनीतिक गलियारों में बैटिंग तेज हो गई है। जेडीयू के केसी त्यागी ने उनके सुर में सुर मिलाते हुए कहा हमारी पार्टी छोटी पार्टी है इसलिए हमने किसी को पीएम पद के लिए मनोनीत तो नहीं किया है। लेकिन नीतीश निसंदेह प्रधानमंत्री पद के सबसे उपयुक्त दावेदार हैं।
पासवान ने कहा, कानून व्यवस्था से ध्यान भटकाने की कोशिश
राम विलास पासवान
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वहीं बिहार में उनके विरोधी केन्द्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने कहा यह ख्याली पुलाव है, राज्य में बिगड़ती कानून व्यवस्था से ध्यान भटकाने के लिए इस तरह की बातें उन्हीं के द्वारा करवाई जाती हैं।
उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बसपा सुप्रीमो मायावती भी शरद पवार के इस तर्क से सहमत नजर नहीं आई। कहा यह आंकलन बहुत पहले लगाया जा रहा है, अभी लोकसभा चुनावों में बहुत लंबा समय शेष है। मैं उनकी बात से सहमत नहीं हूं।
भाजपा नेता गिरीराज सिंह ने कहा प्रधानमंत्री मोदी अभी लंबे समय तक इस पद से हटने वाले नहीं हैं। आज दुनिया उन्हें स्वीकार कर रही है। इसलिए किसी और के लिए अभी कोई गुंजाइश नहीं है।
वहीं समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सदस्य नरेश अग्रवाल ने कहा यह शरद पवार की निजी राय हो सकती है। फिलहाल हमारी पार्टी इसे समर्थन नहीं कर रही है।