केंद्रीय केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग, सूक्ष्म-लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री नितिन गडकरी ने राज्य सरकारों से एमएसएमई के बकाये का भुगतान जल्द करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और बड़े उद्योगों सहित कई राज्य सरकारों पर एमएसएमई का तकरीबन पांच लाख करोड़ रुपये का भुगतान बकाया है। इसके लिए मुख्यमंत्रियों को पत्र भी लिखा है। हालांकि पांच लाख करोड़ में से 40 हजार करोड़ रुपये का भुगतान कराया जा चुका है।
अमर उजाला के विभिन्न संस्करणों के संपादकों से वेबिनार के जरिए संवाद में गडकरी ने कहा कि ऐसे समय में जब हम एमएसएमई के जरिए आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में जुटे हैं, तब इतना बड़ा बकाया उचित नहीं है। गडकरी ने कहा कि बकाया लेने के लिए उद्यमी केंद्र सरकार के चैंपियन पोर्टल पर पंजीकरण कराएं। ताकि उनकी मदद की जा सके।
उद्योगों में स्थानीय मजदूर भी
गडकरी ने प्रवासी श्रमिकों के पलायन पर कहा कि ऐसी धारणा बना दी गई है कि देश में उद्योग धंधे खत्म हो जाएंगे। हकीकत यह है कि उद्योगों में सिर्फ 30 फीसदी ही प्रवासी होते हैं। 70 फीसदी स्थानीय कामगार होते हैं।
सख्ती के भी दिेए संकेत
गडकरी ने कहा कि एमएसएमई का बड़े उद्योगों पर भी भारी बकाया है। मगर इस समय खुद बड़े उद्योग भी संकट में हैं। ऐसे में सरकार तत्काल कोई कमद नहीं उठा रही है। हां भविष्य में स्थिति ठीक हो जाने पर सरकार ऐसी स्थिति से एमएसएमई को बचाने के लिए सख्त कानून बनाएगी।