गडकरी के बयान से सेवानिवृत्ति की अटकलें जरूर तेज हुईं, लेकिन उनके कार्यालय ने स्थिति साफ कर दी। गडकरी राजनीति से पीछे हटने की नहीं, अपने ट्रस्ट के सामाजिक कामों की जिम्मेदारी नई पीढ़ी को सौंपने की बात कर रहे थे। क्या है पूरा मामला? जानिए...
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के एक बयान के बाद उनके सार्वजनिक जीवन से सेवानिवृत्ति की अटकलें शुरू हो गईं। कुछ मीडिया चैनलों ने उनके ‘अब पहले जितना काम नहीं कर सकता’ वाले बयान को राजनीति से जोड़कर पेश किया। इसके बाद गडकरी के कार्यालय ने साफ किया कि उनकी टिप्पणी का राजनीति से कोई संबंध नहीं था। कार्यालय ने कहा कि गडकरी लक्ष्मणराव मानकर ट्रस्ट के सामाजिक कामों के बारे में बोल रहे थे। उन्होंने कहा था कि अब वह पहले की तरह ज्यादा काम नहीं कर सकते। इसलिए नई पीढ़ी को आगे आना चाहिए और ट्रस्ट की जिम्मेदारी संभालनी चाहिए।
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काटोल के कार्यक्रम में कही थी यह बात
गडकरी सोमवार को नागपुर के काटोल में एकलव्य एकल विद्यालय शिक्षक-पर्यवेक्षक प्रशिक्षण वर्ग को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने ट्रस्ट के सफर और आदिवासी क्षेत्रों में उसके काम का जिक्र किया। इसी दौरान उन्होंने कहा कि अब वह ट्रस्ट के काम में पीछे रहेंगे, ताकि नई पीढ़ी सामाजिक गतिविधियों में आगे आ सके। उन्होंने कहा कि पहले जब जितना काम कर सकते थे, किया। अब उनकी भागीदारी कम हो गई है और उन्होंने लोगों से कह दिया है कि काम नई पीढ़ी के हाथों में दिया जाना चाहिए।
आदिवासी गांवों तक विकास पहुंचाने का लक्ष्य
नितिन गडकरी ने कहा कि ट्रस्ट का काम धीरे-धीरे फिर विस्तार कर रहा है। उनका लक्ष्य है कि एक दिन महाराष्ट्र का कोई भी आदिवासी गांव अंधेरे में न रहे और वहां विकास की रोशनी पहुंचे। उन्होंने कहा कि इस तस्वीर को बदलना ही ट्रस्ट का काम है। उन्होंने शिक्षकों से अपने व्यक्तित्व, काम और क्षमता को बेहतर बनाने की अपील की साथ ही कहा कि लोगों के अच्छे गुणों से सीखना चाहिए। व्यक्तित्व को मजबूत बनाने के बाद समाज और गरीबों के लिए समय देना चाहिए और अंधेरे में जीवन जी रहे लोगों की जिंदगी में रोशनी लाने के लिए काम करना चाहिए।
सेहत को भी बताया जरूरी
नितिन गडकरी ने अपनी जीवनशैली का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राजनीति के शुरुआती दिनों में वह हर परिस्थिति में काम करते थे और यात्रा के दौरान जो मिलता था, वही खाते थे। कोविड के बाद उन्होंने जीवन में अनुशासन लाया और अब नियमित रूप से योग करते हैं। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में पद, सत्ता और प्रतिष्ठा से ज्यादा जरूरी अच्छी सेहत है। अगर स्वास्थ्य ठीक नहीं है तो पद और सत्ता का क्या फायदा।