देश के कई हिस्सों समेत दिल्ली-एनसीआर में प्याज की कीमतें 50 से 60 रुपये किलो तक पहुंच गई हैं। इस बीच उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे ने मंगलवार को कहा कि 800 टन प्याज लेकर पहली 'कांदा एक्सप्रेस' बुधवार को राष्ट्रीय राजधानी पहुंचेगी। इस प्याज को 35 रुपये प्रति किलोग्राम की रियायती दर पर बेचा जाएगा।
खरे ने सोशल मीडिया मंच पर बताया कि राष्ट्रीय राजधानी में प्याज की खुदरा बिक्री नेफेड, एनसीसीएफ और केंद्रीय भंडार के स्टोर के जरिए की जाएगी। उन्होंने कहा कि बड़ी मात्रा में प्याज को समर्पित रेलवे रेक के जरिए चार अन्य केंद्रों चेन्नई, एर्नाकुलम, मदुरै और गुवाहाटी भी भेजा जा रहा है।
महाराष्ट्र से लाया जा रहा प्याज का बफर स्टॉक
इन उपभोक्ता केंद्रों के लिए भेजा जा रहा प्याज महाराष्ट्र के नासिक में रखे गए बफर स्टॉक का हिस्सा है। कीमतों में बढ़ोतरी को रोकने के लिए इस स्टॉक को बाजार में उतारा जा रहा है। मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, देश में प्याज की औसत खुदरा कीमत 24 अगस्त को सालाना आधार पर 59 प्रतिशत बढ़कर 43.53 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई। एक साल पहले यह कीमत 27.37 रुपये प्रति किलोग्राम थी।
इसी तरह, प्याज की औसत थोक कीमत 68 प्रतिशत बढ़कर 35.58 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई, जबकि एक साल पहले यह 21.23 रुपये प्रति किलोग्राम थी। प्रमुख शहरों में सोमवार को प्याज की खुदरा कीमत चेन्नई में 60 रुपये प्रति किलोग्राम रही, जो एक साल पहले 33 रुपये थी। दिल्ली में कीमत 55 रुपये रही, जबकि एक साल पहले यह 35 रुपये थी। कोलकाता में प्याज 53 रुपये प्रति किलोग्राम बिका।
बीते साल देश भर में भेजा गया था 88 हजार टन प्याज
बड़ी मात्रा में प्याज की ढुलाई को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से ‘कांदा एक्सप्रेस’ पहल 2024-25 में शुरू की गई थी। इसके बाद से इसका विस्तार किया गया है। वित्त वर्ष 2024-25 में करीब 12,000 टन बफर स्टॉक वाला प्याज 14 रेलवे रेक के जरिए पांच शहरों में भेजा गया था। वित्त वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 86 रेक हो गया, जिनके जरिए देश के 16 प्रमुख शहरों में करीब 88,000 टन प्याज भेजा गया।
भारत सरकार के पास कितना है प्याज का बफर स्टॉक?
प्याज का बफर स्टॉक केंद्र सरकार का रणनीतिक भंडार है। इसे मुख्य रूप से आपूर्ति कम होने पर कीमतों में तेज बढ़ोतरी से बाजार को बचाने के लिए तैयार किया जाता है। सरकार मूल्य स्थिरीकरण कोष योजना के तहत प्याज उत्पादक राज्यों में इसका भंडार रखती है। सरकार ने 2026 के लिए करीब 1.21 लाख टन प्याज का बफर स्टॉक रखा है।
सरकार के अनुसार, आने वाले महीनों में घरेलू मांग को पूरा करने के लिए प्याज की उपलब्धता पर्याप्त बनी हुई है। वित्त वर्ष 2025-26 में प्याज का उत्पादन 307.37 लाख टन रहने का अनुमान है, जो पिछले साल के 307.67 लाख टन के लगभग बराबर है।
प्याज की कीमतों में आम तौर पर अगस्त-सितंबर के दौरान मौसमी बढ़ोतरी देखी जाती है। इसके पीछे त्योहारों के दौरान बढ़ती मांग, मौसम से जुड़ी बाधाएं, आपूर्ति श्रृंखला में बदलाव और मांग के बदलते पैटर्न जैसे कारण होते हैं।