नीति आयोग अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप के द्वीप समूहों में ईको-टूरिज्म करेगा विकसित।
नीति आयोग अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप के द्वीप समूहों में ईको-टूरिज्म विकसित करने की योजना पर काम कर रहा है। इसके लिए नीति आयोग जल्द ही पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत निवेश के लिए एक कॉन्फ्रेंस का आयोजन करने जा रहा है।
नीति आयोग के मुताबिक यह इनवेस्टर कॉन्फ्रेंस आगामी 10 अगस्त को प्रवासी भारतीय केन्द्र में आयोजित की जाएगी जिसका उद्घाटन नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत करेंगे। इस कॉन्फ्रेंस का उद्देश्य अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप के द्वीप समूहों के समग्र विकास के साथ ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए निवेश उत्साहित करना है।
गृह मंत्री के नेतृत्व में जून 2017 में आइसलैंड डेवलेपमेंट एजेंसी (आईडीए) का गठन किया गया था, जिसका उद्देश्य द्वीपों में विकास के साथ समुद्री विकास भी था। वहीं नीति आयोग को द्वीपों के विकास के लिए केन्द्र शासित राज्यों और राज्य सरकारों के साथ सहयोग बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस प्रोग्राम में पहले चरण में अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप में 10 द्वीपों का चयन किया गया है।
आईडीए अंडमान-निकोबार के 6 और लक्षद्वीप के 5 द्वीपों में पर्यटन की दृष्टि से इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स डेवलेप करने, रो-रो फैरी सेवा, विलवणीकरण संयंत्र, डिजिटल कनेक्टिविटी और ग्रीन एनर्जी के विकास की योजनाएं तय करेगा। इसके अलावा कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने के लिए दिगलीपुर में सिविलियन एयरक्राफ्ट्स के लिए दिसंबर 2018 तक एयरपोर्ट को चालू करना है, जबकि अगत्ति एयरपोर्ट को विस्तार देने का काम किया जा रहा है। ये प्रोजेक्ट्स अंडमान-निकोबार के स्मिथ, एव्स, लॉन्ग, नील एंड लिटिल द्वीपों और लक्षद्वीप के कदमत, सुहेली और मिनीकॉय में शुरु किए जाएंगे।