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अनुमान: कोरोना की दूसरी लहर से कमजोर हुई अर्थव्यवस्था, नीति आयोग ने कहा- जीडीपी सुधरने में लगेगा वक्त

Sat, 05 Jun 2021 01:13 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

कोरोना की पहली लहर से उबरी भारतीय अर्थव्यवस्था फिर से चौपट हो गई। दूसरी लहर से अर्थव्यवस्था  चरमरा गई है। आर्थिक मामलों के जानकारों ने कहा था कि दूसरी लहर जीडीपी को प्रभावित नहीं करेगी  लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब नीति आयोग ने इस पर अपना पक्ष रखा है। 
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राजीव कुमार, उपाध्यक्ष, नीति आयोग - फोटो : ANI
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विस्तार
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कोरोना की बेकाबू दूसरी लहर ने अर्थव्यवस्था को तगड़ा झटका दिया है। महामारी की वजह से अर्थव्यवस्था को नुकसान हुआ है। लेकिन नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने कहा कि जून से अर्थव्यवस्था में सुधार की संभावना है।

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गौरतलब है कि आरबीआई ने वित्त वर्ष 2021-2022 की जीडीपी अनुमान को 10.5 फीसदी से घटाकर 9.5 फीसदी कर दिया है। राजीव कुमार के मुताबिक हालांकि, अर्थव्यवस्था जिस रफ्तार से बढ़नी चाहिए उस अनुपात में तो नहीं बढ़ेगी, लेकिन स्थिति में सुधार होगी। देश की अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2022 में 10 फीसदी से 10.5 फीसदी की गति से आगे बढ़ेगी।

 उन्होंने कहा कि कोरोना की दूसरी लहर से देश बुरी तरह प्रभावित हुआ है। लोग इससे काफी सहमे और डरे हुए हैं, लेकिन टीकाकरण होने के बाद लोगों के अंदर से डर खत्म हो जाएगा और लोग अपने काम पर लौटेंगे।
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नीति आयोग के उपाध्यक्ष ने कहा कि अर्थव्यवस्था के ठीक होने के बाद विकास अनुमानों को संशोधित करेंगे। उनका कहना है कि जून से सुधार  शुरू हो जाएगी और जुलाई से अर्थव्यवस्था को रफ्तार मिलेगी। रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2022 की पहली तिमाही में जीडीपी विकास अनुमान को कम कर दिया है। दूसरी तिमाही में 7.9 फीसदी, तीसरी तिमाही में 7.2 फीसदी और चौथी तिमाही में 6.6 फीसदी जीडीपी विकास का अनुमान है। वित्त वर्ष 2022 में वास्तविक जीडीपी के अनुमान को 10.5 फीसदी से घटाकर 9.5 फीसदी कर दिया गया है।

विकास अनुमानों को करेंगे संशोधित
राजीव कुमार का कहना है कि अर्थव्यवस्था के ठीक होने के बाद हम आरबीआई के विकास अनुमानों को संशोधित करेंगे। उनका कहना है कि जून से सुधार शुरू हो जाएगी और जुलाई से अर्थव्यवस्था को रफ्तार मिलेगी। राजीव कुमार ने कहा कि कोरोना वायरस महामारी की दूसरी लहर से राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को ज्यादा प्रभावित नहीं करेगी। हालांकि इसका थोड़ा असर जरूर होगा। उन्होंने कहा कि कोविड-19 ने सरकार को अधिक निवेश करने, सार्वजनिक बुनियादी ढांचे पर अधिक खर्च करने के लिए मजबूर किया है, लेकिन इसका अर्थव्यवस्था पर ज्यादा असर नहीं होगा क्योंकि जीएसटी संग्रह बढ़ा है।

जीएसटी कलेक्शन से नुकसान की भरपाई
हालांकि कोरोना की दूसरी लहर के दौरान जीएसटी कलेक्शन ने सरकार की तिजोरी भरने में अहम भूमिका अदा की है। नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने बताया कि दूसरी लहर राजकोषीय घाटे को ज्यादा प्रभावित नहीं की है। हालांकि थोड़ा असर तो जरूर देखा गया है, लेकिन इसकी भरपाई जीएसटी कलेक्शन ने कर दी है। उन्होंने कहा कि इस दौरान सरकार को अधिक निवेश करने, सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए बाध्य किया है।  बता दें कि मार्च 2021 में जीएसटी कलेक्शन ने नए रिकॉर्ड बनाए हैं। जीएसटी कलेक्शन 26 फीसदी बढ़कर 1.23 लाख करोड़ हो गया है। 

दरअसल, कोरोना की दूसरी लहर को देखते हुए कई राज्यों में फिर से लॉकडाउन लागू है, जिसके चलते औद्योगिक गतिविधियों में कमी आने लगी है। फैक्ट्रियां और उद्योग-धंधे सब ठप हैं। लॉकडाउन के कारण बड़ी संख्या में मजदूर अपने-अपने राज्य लौट चुके हैं, ऐसे में सामानों की आपूर्ति पूरी तरह से बंद पड़ी है।

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