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नीति आयोग का दावा, मार्च 2022 तक कोविड से पहले जैसी होगी अर्थव्यवस्था

Mon, 07 Dec 2020 01:28 AM IST
Jeet Kumar एजेंसी, नई दिल्ली।
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नीति आयोग - फोटो : फाइल फोटो
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देश की अर्थव्यवस्था के लिहाज से अच्छी खबर है। नीति आयोग ने वित्त वर्ष 2021-22 के अंत यानी मार्च 2022 तक देश की आर्थिक वृद्धि दर कोविड-19 (कोरोना वायरस) महामारी से पहले के स्तर पर ही पहुंच जाने की संभावना जताई है।

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नीति आयोग का उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने रविवार को कहा कि आर्थिक वृद्धि को लेकर यह उम्मीद चालू वित्त वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की संकुचन दर आठ फीसदी से कम रहने की संभावना के चलते जगी है।


भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने भी चालू वित्त वर्ष (2020-21) के संशोधित पूर्वानुमान में आर्थिक वृद्धि दर के माइनस 7.5 फीसदी रहने की संभावना जाहिर की है, जबकि पहले इसके माइनस 9.5 फीसदी रहने का पूर्वानुमान जताया गया था।
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भारतीय अर्थव्यवस्था सितंबर तिमाही में लगाए गए अनुमान के मुकाबले ज्यादा तेजी से रिकवरी कर रही है। इसका एक कारण विनिर्माण के क्षेत्र में उछाल आना है, जो जीडीपी को 7.5 फीसदी के कम सिकुड़न वाले स्तर पर पहुंचने में मदद कर रहा है और आगे बेहतर उपभोक्ता मांग के लिए उम्मीदें पैदा कर रहा है।

संपत्ति मुद्रीकरण को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में राजीव कुमार न े कहा, यह जारी प्रक्रिया है और इसने उच्च स्तर पर बहुत सारा आकर्षण हासिल किया है। उन्होंने जोर देते हुए कहा, हम लगातार इसे आगे बढ़ाते रहेंगे और इस बात को सुनिश्चित करेंगे कि संपत्ति मुद्रीकरण का लक्ष्य हासिल हो जाए।

बता दें कि सरकार चालू वित्त वर्ष के दौरान विनिवेश के जरिये 2.10 लाख करोड़ रुपये की रकम उगाहना चाहती है। इसमें केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां (सीपीएसई) भी शामिल हैं, जिनकी 1.20 लाख करोड़ रुपये की हिस्सेदारी बेची जाएगी। इसके अलावा वित्तीय संस्थानों में सरकार की हिस्सेदारी की बिक्री से 90 हजार करोड़ रुपये जुटाए जाएंगे।

रसायन मुक्त खेती के कार्यक्रमों को मिलेगा बढ़ावा
नीति आयोग के उपाध्यक्ष ने भारतीय कृषि क्षेत्र को लेकर कहा कि नीति आयोग अब रसायन मुक्त प्राकृतिक खेती से जुड़े कार्यक्रमों को मजबूती से आगे बढ़ाएगा, जो कृषि उत्पादन की लागत को नाटकीय तरीके से कम करने की क्षमता रखते हैं और पर्यावरण पर भी प्राकृतिक प्रभाव डालते हैं।

उन्होंने कहा, प्राकृतिक खेती को पूरे देश में फैलने से भारतीय कृषि क्षेत्र ज्यादा प्रतिस्पर्धात्मक बनेगा और यह किसानों की आय पर भी महत्वपूर्ण सकारात्मक प्रभाव डालने का वादा करेगा।

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