नीति आयोग के सीईओ कांत ने कहा कि मानव केंद्रित सभी योजनाओं के लिए यह सिफारिश हमारी ओर से की गई है। इसमें फ्लैक्सी फंड के तहत जिला कलेक्टर संविदा पर नियुक्ति कर अपने जिले को सुविधाएं देंगे। उन्होंने कहा कि समिति के पास यह अधिकार है कि जो आकांक्षी जिला अच्छा प्रदर्शन करेगा उसे ज्यादा कोष जारी किया जाएगा।
जबकि खराब प्रदर्शन वाले जिला कलेक्टरों को इस प्रतिस्पर्धा में शर्म का सामना करना पड़ेगा। कांत ने उदाहरण देते हुए कहा कि हाल ही में इन जिलों की रैंकिंग में हरियाणा के मेवात जिले का नाम जैसे ही नीचे आया, हरियाणा के मुख्यमंत्री ने अधिकारयिं को कड़ी फटकार लगाई। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, लेकिन आकांक्षी जिलों के मामले में आए दिन रैंकिंग जारी की जाएगी और जो अधिकारी काम नहीं करेंगे उनके खाते में फटकार के सिवा कुछ नहीं आएगा। उन्हें केंद्र और राज्य, दोनों ही इस मामले में नहीं बख्शेंगी।
कांत ने कहा कि हमारा इरादा बिल्कुल स्पष्ट है और पूर्ण सकारात्मकता के साथ हम राज्यों के अधिकारियों से विचार-विमर्श कर आगे बढ़ रहे हैं। लेकिन आकांक्षी जिलों के मामले में कोई बहानेबाजी केंद्र की ओर से बर्दाश्त नहीं की जाएगी। गौरतलब है कि हाल ही में देश में सबसे खराब प्रदर्शन वाले जिले हरियाणा का मेवात एवं तेलंगाना का आसिफाबाद और मध्यप्रदेश का सिंगरौली आया था।