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राम मंदिर ट्रस्ट के पुनर्गठन की मांग: सुप्रीम कोर्ट पहुंचा निर्मोही अखाड़ा, 2019 के अयोध्या फैसले पर क्या कहा?

Sat, 18 Jul 2026 11:05 PM IST
Pavan एएनआई, नई दिल्ली

सार

निर्मोही अखाड़े ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा है कि 2019 के अयोध्या फैसले का पूरी तरह पालन नहीं हुआ। अखाड़े ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पुनर्गठन, ट्रस्ट में उचित प्रतिनिधित्व, धार्मिक परंपराओं में अपनी भूमिका बहाल करने और ट्रस्ट के वित्तीय लेन-देन की फोरेंसिक जांच कराने की मांग की है।
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सुप्रीम कोर्ट पहुंचा निर्मोही अखाड़ा - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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श्री पंच रामानंदी निर्मोही अखाड़ा ने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले में सुप्रीम कोर्ट का फिर रुख किया है। अखाड़े ने एक नई याचिका दाखिल कर कहा है कि 9 नवंबर 2019 को आए अयोध्या मामले के ऐतिहासिक फैसले का पूरी तरह पालन नहीं हुआ है। अखाड़े का कहना है कि फैसले में उसे राम मंदिर के प्रबंधन में उचित भूमिका और प्रतिनिधित्व देने की बात कही गई थी, लेकिन ऐसा अब तक नहीं किया गया।
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ट्रस्ट के पुनर्गठन की मांग
निर्मोही अखाड़ा ने अपनी याचिका में कहा है कि केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन तो किया, लेकिन ट्रस्ट की संरचना में अखाड़े को वह स्थान नहीं मिला, जिसकी बात अदालत ने अपने फैसले में कही थी। अखाड़े ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि ट्रस्ट का पुनर्गठन कर उसे सार्वजनिक ट्रस्ट (पब्लिक ट्रस्ट) बनाया जाए, ताकि उसके कामकाज में अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।

प्रतिनिधित्व नहीं मिलने का आरोप
याचिका में कहा गया है कि ट्रस्ट में सरकार द्वारा किसी एक व्यक्ति को नामित कर देना निर्मोही अखाड़े का प्रतिनिधित्व नहीं माना जा सकता। अखाड़े का कहना है कि उसकी परंपरा के अनुसार प्रतिनिधियों का चयन पंचायत व्यवस्था के तहत सामूहिक रूप से किया जाता है, न कि सरकार द्वारा नामित व्यक्ति के जरिए।
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धार्मिक परंपराओं में भूमिका की भी मांग
निर्मोही अखाड़े ने अदालत से यह भी अनुरोध किया है कि उसे राम मंदिर में पूजा, सेवा, भोग, आरती और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों की पारंपरिक जिम्मेदारी निभाने का अधिकार दिया जाए। अखाड़े का दावा है कि वह सदियों से रामानंदी परंपरा के अनुसार इन धार्मिक कार्यों से जुड़ा रहा है।

दान और ट्रस्ट के कामकाज पर भी उठाए सवाल
याचिका में हाल के दिनों में राम मंदिर में दान और कीमती सामान के प्रबंधन को लेकर सामने आए विवादों का भी उल्लेख किया गया है। अखाड़े ने कहा है कि इन घटनाओं से ट्रस्ट के कामकाज में अधिक पारदर्शिता और निगरानी की जरूरत साबित होती है। हालांकि, यह सभी आरोप निर्मोही अखाड़े की ओर से लगाए गए हैं और इन पर अभी सुप्रीम कोर्ट ने कोई टिप्पणी या फैसला नहीं दिया है।

मूल मूर्तियों को लेकर भी उठाया मुद्दा
निर्मोही अखाड़े ने यह भी दावा किया है कि ट्रस्ट को केवल मंदिर का प्रशासन संभालने का अधिकार दिया गया था, मूल विग्रह (मूर्तियों) को बदलने का नहीं। याचिका में मांग की गई है कि मूल मूर्तियों को दोबारा गर्भगृह में स्थापित किया जाए या फिर उन्हें अखाड़े को सौंपा जाए।

सुप्रीम कोर्ट से क्या-क्या मांग की?
निर्मोही अखाड़े ने सुप्रीम कोर्ट से कई निर्देश जारी करने की मांग की है, जिनमें प्रमुख हैं:
  • श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का पुनर्गठन कर उसे सार्वजनिक ट्रस्ट बनाया जाए।
  • ट्रस्ट के बोर्ड में निर्मोही अखाड़े को उचित प्रतिनिधित्व दिया जाए।
  • पूजा-पाठ और धार्मिक परंपराओं में अखाड़े की भूमिका को मान्यता मिले।
  • ट्रस्टियों की नियुक्ति के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए जाएं।
  • मूल विग्रहों की बहाली की जाए।
  • 2019 के फैसले के पालन की जांच के लिए स्वतंत्र समिति गठित की जाए।
  • ट्रस्ट के वित्तीय और संपत्ति संबंधी लेन-देन का फोरेंसिक ऑडिट कराया जाए।
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निर्मोही अखाड़े की इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के बाद ही यह तय होगा कि अदालत इस मामले में कोई नया निर्देश जारी करती है या नहीं।
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