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Lok Sabha: टीएमसी के बागी सांसदों को अलग सीट मिलने के फैसले पर हैरान नहीं हुए शशि थरूर, बताई क्या वजह?

Sat, 18 Jul 2026 10:45 PM IST
Devesh Tripathi पीटीआई, तिरुवनंतपुरम

सार

लोकसभा में टीएमसी के बागी सांसदों को अलग बैठने की अनुमति मिलने पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उनके पास पर्याप्त संख्या होने के कारण उनके दावे को नजरअंदाज करना आसान नहीं था। उन्होंने कहा कि इस मामले में संबंधित पक्ष कानूनी विकल्पों पर विचार कर सकता है।
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कांग्रेस सांसद शशि थरूर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने शनिवार को कहा कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के 20 बागी सांसदों को सदन में अलग से बैठने की अनुमति देने के फैसले पर उन्हें कोई हैरानी नहीं है। टीएमसी के इन बागी सांसदों ने एनसीपीआई का दामन थाम लिया है, जो एक छोटी सी पार्टी थी।
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एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बातचीत में थरूर ने कहा कि टीएमसी के बागी सांसदों के पास पर्याप्त संख्या है। ऐसे में उनके अलग बैठने के दावे को खारिज करना मुश्किल था। साथ ही उन्होंने कहा कि इस मामले में संबंधित दल अदालत का दरवाजा खटखटाने समेत सभी कानूनी विकल्पों पर विचार करेंगे।

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थरूर क्यों बोले- बागी सांसदों का दावा खारिज करना था मुश्किल?
शशि थरूर ने कहा, "हां, मुझे इस पर कोई हैरानी नहीं है। मेरा मतलब है कि उनके पास पर्याप्त संख्या है। अगर 26 में से 20 सांसद उनके साथ हैं तो उनके दावे को खारिज करना बहुत मुश्किल है। हालांकि, मुझे पूरा भरोसा है कि इन मुद्दों पर संबंधित दल अदालतों के जरिए कानूनी विकल्पों सहित सभी रास्तों पर विचार करेंगे।"

कांग्रेस सांसद ने कहा कि टीएमसी के बागी सांसदों का यह कदम आखिरकार "सिद्धांतों की राजनीति के साथ विश्वासघात" है। उन्होंने कहा, "आप एक मजबूत विपक्ष के रूप में चुने गए थे, लेकिन इसके बजाय आपने सत्तारूढ़ व्यवस्था का हिस्सा बनने का फैसला किया। इससे बहुत कुछ बदल जाता है।" थरूर ने कहा कि संसद का सत्र विचार रखने और गंभीर चर्चा का सार्थक मंच होना चाहिए।

विपक्ष को मिले बोलने का मौका : कांग्रेस सांसद
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार कुछ "बहुत महत्वपूर्ण विधेयक" लाने जा रही है, जिन पर गंभीरता से विचार किए जाने की जरूरत है। विपक्ष के कई दल प्रस्तावित विधेयकों के संभावित असर को लेकर गंभीर रूप से चिंतित हैं। इसलिए उन्हें भी अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलना चाहिए।
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उन्होंने कहा, "हम चाहते हैं कि इन पर चर्चा हो। लेकिन सरकार को भी सहयोग करना होगा और विपक्ष को अपनी बात रखने का अधिकार देना होगा। एक पुरानी कहावत है कि विपक्ष को अपनी बात कहने का अधिकार होना चाहिए और यदि सरकार के पास बहुमत है तो अंततः उसकी बात मानी जाएगी। उनके पास बहुमत है और ऐसा लगता भी है। लेकिन विपक्ष को भी अपनी बात रखने दी जानी चाहिए। यह बहुत महत्वपूर्ण है।"
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