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खराब हालत की वजह से राफेल सौदे से बाहर हुआ एचएएल, सीतारमण का एंटनी पर सौदे में दखल का आरोप

Fri, 14 Sep 2018 05:32 AM IST
एजेंसी, नई दिल्ली 
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Nirmala Sitaraman
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राफेल सौदे से सरकारी कंपनी एचएएल को बाहर किए जाने पर रक्षा मंत्री ने उसकी खराब हालत को वजह बताया है। भारत में राफेल विमानों का उत्पादन खर्च भी बहुत ज्यादा बैठ रहा था। रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने तत्कालीन रक्षा मंत्री एके एंटोनी पर भी अनावश्यक दखल देने का आरोप लगाया। 
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समाचार एजेंसी से बातचीत में रक्षा मंत्री ने कहा कि एचएएल के पास इतनी क्षमता ही नहीं थी कि वह फ्रांसिसी कंपनी दासो एविएशन के साथ मिलकर भारत में इस अत्याधुनिक जेट विमान का निर्माण कर सके।   एचएएल के साथ कई दौर की वार्ता के बाद दासो एविएशन को लगा कि अगर इन लड़ाकू विमानों का उत्पादन भारत में किया गया तो लागत में बहुत ज्यादा बढ़ोत्तरी हो जाएगी। एचएएल के साथ बातचीत में कोई प्रगति इसलिए भी नहीं हो सकी क्योंकि भारतीय वायुसेना को इन विमानों के लिए गारंटी चाहिए थी और एचएएल गारंटी दे पाने की स्थिति में नहीं थी।  

राफेल विमानों में हथियार प्रणाली और दूसरे एड-ऑन फीचर लगाए जाने के बाद यह यूपीए द्वारा किए गए सौदे से कहीं ज्यादा आधुनिक होने के साथ ही 9 फीसदी तक सस्ता बैठेगा।  रक्षा मंत्री ने कहा है कि  2013 में लागत वार्ता समिति द्वारा सौदे को अंतिम रूप दिए जाने के दौरान तत्कालीन रक्षा मंत्री एके एंटोनी द्वारा की गई दखलंदाजी इस सौदे में आखिरी कील साबित हुई। हालांकि इस दखलंदाजी को लेकर उन्होंने स्पष्ट रूप से कुछ नहीं कहा। रक्षा मंत्री के कहा कि उनकी सरकार ने एचएएल की क्षमता का बढ़ाने के लिए तमाम प्रयास किए। 
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दरअसल कांग्रेस ने इस सौदे से एचएएल को बाहर किए जाने पर सवाल उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा था। इस सौदे के अनुसार दासो एविएशन को 18 राफेल विमान पूरी तरह तैयार हालत में उपलब्ध कराने थे और 108 विमान का उत्पादन एचएएल के साथ मिलकर भारत में करना था। कांग्रेस 526 करोड़ में तय विमान की कीमत को 1670 करोड़ किए जाने को लेकर लगातार केंद्र सरकार पर आरोप लगा रही है। इस पर रक्षा मंत्री ने कहा कि 526 करोड़ की कीमत वाला विमान सिर्फ उड़ने और उतरने की क्षमता रखता था। इसमें लगाए जाने वाले साजों सामान के चलते कीमत में यह बढ़ोत्तरी हुई है। 

कांग्रेस के आरोपों पर रक्षा मंत्री ने कहा कि देश के लोगों ने इस मुद्दे को बंद  कर दिया है क्योंकि उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर पूरा भरोसा है। इस मुद्दे पर विपक्षी दलों  बैठक बुलाकर शंका दूर करने से इंकार करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि वे बिना किसी आधार के केवल आरोप लगा रहे है उन्हें वायु सेना की क्षमताओं को लेकर कोई चिंता नहीं है। हमने साबित किया है कि रक्षा मंत्रालय बिचौलियों की मदद के बिना भी रक्षा सौदों को पारदर्शिता के साथ पूरा कर सकता है। 
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