विवादित कर मामलों को निपटाने की दिशा में सरकार को बड़ी सफलता मिली है। करदाताओं को 31 मार्च तक कर बकाया चुकाकर ब्याज व जुर्माने से राहत मिलने का रास्ता शुक्रवार को राज्यसभा में साफ हो गया। उच्च सदन में प्रत्यक्ष कर विवाद से विश्वास बिल ध्वनिमत से पारित हो गया। लोकसभा में यह बिल 4 मार्च को पारित हो चुका है।
वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, यह बिल करदाताओं को उनके विवाद निपटाने का विकल्प देने के लिए है। कुछ सदस्यों ने बिल पर चिंता जाहिर करते हुए सवाल उठाया है कि केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) बिल के संसद में पारित होने से पहले योजना का सर्कुलर कैसे जारी कर सकता है।
इसका जवाब देते हुए वित्तमंत्री ने कहा, वहां विशेषाधिकार को कोई उल्लंघन नहीं किया गया है। योजना की अंतिम तिथि को सरकार द्वारा अधिसूचित यिका जाएगा और इसको लेकर कोई भ्रम नहीं है। राज्यों को सभी भाषाओं में सर्कुलर जारी कर बिल की पूरी जानकारी दी जाएगी।
वित्तमंत्री ने कर निपटान की इस योजना का जिक्र आम बजट में किया था और दो मार्च को इसे लोकसभा में पेश किया था। अभी विभिन्न मंचों पर 9.32 लाख करोड़ रुपये के करीब 4.83 लाख प्रत्यक्ष कर मामले लंबित हैं।