रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण तीन दिन की रूस यात्रा पर हैं। बुधवार को उन्होंने अपने समकक्ष सर्गेई शोइगू और उद्योग-व्यापार मंत्री डेनिस मांटुरोव से मास्को में मुलाकात की। इस दौरान दोनों पक्षों ने रक्षा क्षेत्र में सहयोग मजबूत करने पर बातचीत की। लंबे समय से अटके पड़े 40 हजार करोड़ की लागत वाले एस-400 ट्रायम्फ एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम की खरीद को अंतिम रूप देने पर भी चर्चा की संभावना है।
रक्षा मंत्री अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर सातवें मॉस्को सम्मेलन में हिस्सा लेने गई हैं।
सीतारमण के अनुसार, उनकी यह यात्रा भारत और रूस के बीच पारंपरिक मित्रवत संबंधों खासकर सैन्य तकनीक सहयोग के क्षेत्र को और मजबूत करने का अवसर प्रदान करेगी। रक्षा मंत्री का पद संभालने के बाद सीतारमण की यह पहली रूस यात्रा है। उनका जोर रूस के साथ एस-400 मिसाइल सौदे को अंतिम रूप देने पर है।
चीन से जुड़ी करीब 4 हजार किलोमीटर लंबी सीमा पर सैन्य ताकत बढ़ाने के प्रयासों को देखते हुए भारत के लिए यह रक्षा सौदा काफी अहम है। भारत चीन से बराबरी हासिल करने के लिए एस-400 मिसाइल हासिल करना चाहता है। चीन ने सबसे पहले रूस से इस मिसाइल के लिए करार किया था। साथ ही रक्षा मंत्री परमाणु पनडुब्बी खरीदने के मामले में बने गतिरोध को भी दूर करना चाहेंगी।
भारत के ज्यादातर सैन्य उत्पाद रूस निर्मित हैं। भारत सरकार अहम सैन्य तकनीक के हस्तांतरण के लिए रूस से लचीला रवैया अपनाने का अनुरोध कर रहा है। माना जा रहा है कि दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों की बातचीत में यह मुद्दा भी उठा। दोनों पक्षों ने 11 से 14 अप्रैल तक चेन्नई में होने जा रहे रक्षा एक्सपो में रूस की हिस्सेदारी पर भी बात की।
दोनों नेताओं ने आपस में सैन्य सहयोग के साथ ही द्विपक्षीय और अन्य क्षेत्रीय मुद्दों पर भी चर्चा की। इसके अलावा रक्षा मंत्री वियतनाम, चीन और साइबेरिया के रक्षा मंत्रियों से मिलीं। मंगलवार रात को सीतारमण ने दोनों देशों के राजनयिक संबंधों के 70 साल पूरे होने के अवसर पर आयोजित सरोद वादक उस्ताद अमजद अली खान के कंसर्ट में भी हिस्सा लिया।