वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अंतरिम बजट में पूंजीगत खर्च बढ़ाने का एलान किया है। यह जीडीपी का 3.4% होगा। पिछले चार वर्षों में पूंजीगत खर्च तीन गुना बढ़ाया गया है। इस बढ़ोतरी से आर्थिक विकास और रोजगार सृजन में कई गुना की तेजी आई है। हमारी आर्थिक ताकत ने देश को व्यापार और सम्मेलन पर्यटन के लिए एक आकर्षक गंतव्य बना दिया है।
सीतारमण ने वित्त वर्ष 2024-25 के लिए राजकोषीय अंतर को चालू वित्त वर्ष के 5.8 प्रतिशत से संशोधित कर जीडीपी की तुलना में 5.1 प्रतिशत कर दिया है। पहले लक्ष्य 5.9 फीसदी था। वित्त वर्ष 2025-26 में इसका लक्ष्य 4.5 प्रतिशत रखा गया है। चालू वित्त वर्ष के पहले नौ महीनों में (अप्रैल से दिसंबर तक) राजकोषीय घाटा 9.82 लाख करोड़ रुपये या पूरे वित्त वर्ष के अनुमान का 55 प्रतिशत रहा है। पिछले दस वर्षों में टैक्स से प्राप्ति बढ़कर दोगुना हो गई है। इससे राजकोषीय घाटा को कम करने का लक्ष्य रखा है।
14.13 लाख करोड़ जुटाने का लक्ष्य
वित्त मंत्री ने कहा, 2025-26 में राजकोषीय घाटे को 4.5 प्रतिशत तक कम करने के लिए मजबूती से आगे बढ़ रहे हैं। सरकार 2024-25 में दिनांकित प्रतिभूतियां जारी कर बाजार से 14.13 लाख करोड़ रुपये जुटाएगी। शुद्ध उधारी 11.75 लाख करोड़ लेने का लक्ष्य है। चालू वित्त वर्ष में 15.43 लाख करोड़ रुपये जुटाने का अनुमान है। दिनांकित प्रतिभूतियां एक तय परिपक्वता अवधि वाली लंबे समय की सरकारी प्रतिभूतियां हैं। आमतौर पर ये 5 से 40 वर्ष के लिए होती हैं। इस पर निवेशकों को नियमित ब्याज मिलता है।
नेट जीरो का लक्ष्य पाने के लिए नई योजनाओं की हुई घोषणा
भारत को हरित भविष्य की ओर ले जाने के लिए, बजट 2024 में 2070 तक देश के महत्वाकांक्षी नेट जीरो लक्ष्य को प्राप्त करने के उद्देश्य से एक व्यापक योजना का एलान किया गया है। वित्त मंत्री ने भारत की विशाल अपतटीय पवन ऊर्जा क्षमता के दोहन पर ध्यान देने के साथ, हरित ऊर्जा क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण संसाधन आवंटित किए हैं।
एक उल्लेखनीय पहल में 1 गीगावाट (जीडब्ल्यू) अपतटीय पवन ऊर्जा के विकास के लिए व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण शामिल है, जिससे भारत के नवीकरणीय ऊर्जा पोर्टफोलियो में विविधता लाने और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की उम्मीद है। रणनीति का एक अन्य प्रमुख घटक 2030 तक 100 मीट्रिक टन प्रसंस्करण करने में सक्षम कोयला गैसीकरण और द्रवीकरण परियोजनाओं को स्थापित करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य है।
सीएनजी और पीएनजी में बायोगैस मिश्रण अनिवार्य करेगी सरकार
कार्बन उत्सर्जन को और कम करने के लिए, सरकार परिवहन के लिए कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (सीएनजी) और घरेलू उपयोग के लिए पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) के साथ बायोगैस के मिश्रण को अनिवार्य करने की योजना बना रही है। इस नीति से न केवल वायु गुणवत्ता में सुधार होने की उम्मीद है, बल्कि चक्रीय अर्थव्यवस्था में योगदान करते हुए बायोगैस उद्योग को भी बढ़ावा मिलेगा। बायोमास एकत्रीकरण मशीनरी की खरीद को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय सहायता दी जाएगी, जो बायोएनर्जी के उत्पादन के लिए आवश्यक है। इस कदम से किसानों को बायोएनर्जी आपूर्ति शृंखला में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित होने की संभावना है, जिससे कृषि कचरा प्रबंधन के लिए एक टिकाऊ और लाभदायक मॉडल तैयार होगा। यह कदम प्राकृतिक गैस, मेथनॉल और अमोनिया पर भारत की आयात निर्भरता को कम करने के साथ-साथ स्वच्छ ऊर्जा स्रोत को बढ़ावा देगा।
जी-20 में सबसे ज्यादा विकास दर हमारी
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियों को इशारों-इशारों में कह दिया है कि भारत के प्रति वे अपनी सोच को बदलें। इन एजेंसियों को यह संदेश देना चाहिए कि भारत ने राजकोषीय घाटे को कम करने के लिए निर्धारित लक्ष्यों को बेहतर किया है। न केवल राजकोषीय घाटे के रोडमैप के साथ तालमेल बिठाया, बल्कि इसे बेहतर बनाने का भी काम किया है।
बजट के बाद संवाददाता सम्मेलन में सीतारमण ने कहा, यह एक सरल और सीधा संदेश है। इसे हर रेटिंग एजेंसी को अपनाना चाहिए। कर संग्रह में सुधार के अलावा, बैंकों और वित्तीय संस्थानों से उच्च लाभांश से राजकोषीय घाटे को कम करने में मदद मिलेगी। तीनों वैश्विक रेटिंग एजेंसियों - फिच, एसएंडपी और मूडीज ने स्थिर परिदृश्य के साथ भारत को सबसे कम निवेश ग्रेड रेटिंग दी है। निवेशक रेटिंग को देश की साख और कंपनियों की उधारी पर प्रभाव के पैमाने के रूप में देखते हैं।
सीतारमण ने कहा, सरकार ने विकास संबंधी अपने वादे पूरे किए हैं। अब यह आगे का बजट है। वित्त मंत्री ने साफ किया, यह अंतरिम बजट था, इसलिए इसे वैसे ही बनाए रखने का प्रयास किया है। पीएम मोदी पहले ही बता चुके थे कि यह लेखानुदान का बजट रहने वाला है।
पूर्वी राज्य बनेंगे विकास के इंजन
सीतारमण ने कहा, केंद्र सरकार बिहार, ओडिशा, पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों को विकास के अगले चरण का इंजन बनाना चाहती है। अर्थव्यवस्था यहां से आगे कैसा प्रदर्शन करने वाली है और हम अर्थव्यवस्था को किस तरह से आगे लेकर जाने वाले हैं। इसका खाका हमने इस बजट में तैयार किया है।
सही इरादों व नीतियों के साथ निर्णय
यह बजट उस स्थिति की बात करता है जहां हमने विकास किया है। हमने अर्थव्यवस्था को सही इरादों, सही नीतियों और सही निर्णयों के साथ प्रबंधित किया है, इसलिए यह सावधानीपूर्वक शासन है। लाल सागर क्षेत्र और मध्य पूर्व में एक महत्वपूर्ण गड़बड़ी है। लेकिन यह यह एक ऐसी परियोजना है जिसका पूरे क्षेत्र, यूरोप तक के क्षेत्र पर दीर्घकालिक प्रभाव है, क्योंकि इसमें यूरोप भी शामिल है। अब हम इस परियोजना को आगे बढ़ाएंगे।सीतारमण ने कहा, केंद्र सरकार बिहार, ओडिशा, पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों को विकास के अगले चरण का इंजन बनाना चाहती है। अर्थव्यवस्था यहां से आगे कैसा प्रदर्शन करने वाली है और हम अर्थव्यवस्था को किस तरह से आगे लेकर जाने वाले हैं। इसका खाका हमने इस बजट में तैयार किया है।