2012 का निर्भया कांड क्या था?
16 दिसंबर 2012 को दिल्ली के वसंत विहार में एक चलती बस में निर्भया के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया था और उसे मरने के लिए सड़क पर फेंक दिया गया था। इस दौरान उसके साथ उसका साथी भी उसी बस में सवार था। घटना के सात साल तीन महीने बाद निर्भया को इंसाफ मिला। निर्भया के गुनहगारों में अक्षय ठाकुर, मुकेश सिंह, विनय शर्मा और पवन गुप्ता सहित छह लोग शामिल थे। इसमें रामसिंह नामक एक आरोपी ने जेल में ही फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी और एक नाबालिग को सुधार गृह भेज दिया गया था। वहीं, निर्भया के बाकी चारों गुनहगारों अक्षय ठाकुर, मुकेश सिंह, विनय शर्मा और पवन गुप्ता को 20 मार्च 2020 की सुबह 5.30 बजे फांसी पर लटका दिया गया था।
निर्भया कांड के बाद क्या बदला?
निर्भया कांड के बाद 2013 में आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम, 2013 लाया गया। इसके तहत दुष्कर्म की परिभाषा को व्यापक किया गया और यौन अपराधों से जुड़े कई नए प्रावधान जोड़े गए। यौन उत्पीड़न, पीछा करना (स्टॉकिंग), वॉयूरिज्म और महिला को निर्वस्त्र करने के इरादे से हमला जैसे अपराधों को अलग-अलग अपराध बनाया गया। एसिड अटैक के लिए भी आईपीसी में अलग धाराएं 326A और 326B जोड़ी गईं।
इस कानून में दुष्कर्म के गंभीर मामलों में सजा बढ़ाई गई। दुष्कर्म के कारण पीड़िता की मौत या उसके स्थायी रूप से गंभीर अवस्था में चले जाने की स्थिति में मृत्युदंड तक का प्रावधान किया गया। साथ ही, यौन अपराधों की शिकायत, जांच और सुनवाई की प्रक्रिया से जुड़े कई प्रावधानों में भी बदलाव किए गए।
2012 की घटना के बाद राजधानी में महिला अपराध में क्या कोई कमी आई?
2012 में जिस साल निर्भया कांड हुआ था उस साल राजधानी दिल्ली में दुष्कर्म के कुल 706 मामले दर्ज किए गए थे। 2013 में दुष्कर्म से जुड़े कानूनों को सख्त किया गया। इसके बाद भी इस साल राजधानी में दुष्कर्म के मामले दो गुने से ज्यादा बढ़े। दिल्ली में दुष्कर्म की वरादातों की संख्या बढ़कर 1,636 हो गई। 2014 में इनमें और इजाफा हुआ और ऐसे मामले बढ़कर 2,166 हो गए। 2015 से 2019 के बीच राजधानी में हर साल 2100 से 2200 के बीच महिलाएं दुष्कर्म का शिकार हुईं।
- 2015: 2,199
- 2016: 2,155
- 2017: 2,146
- 2018: 2,135
- 2019: 2,168
- 2021 के बाद घटी दुष्कर्म का मामलों की संख्या
- 2020 में राजधानी में दुष्कर्म की घटनाओं का आंकड़ा छह साल बाद दो हजार के नीचे आया। इस साल कुल 1,699 दुष्कर्म की घटनाएं हुईं।
- 2021 में ये फिर बढ़कर 2,076 पहुंच गईं। 2022 में ऐसे मामले घटकर 1,204 रह गए। 2023 में 1,088 दुष्कर्म की वारदातें हुईं तो 2024 यह संख्या 1,058 रही।
देश में इस तरह के अपराध के आंकड़े क्या कहते हैं?
अब अगर इन घटनाओं को आंकड़ों के नजरिए से देखें तो राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की भारत में अपराध रिपोर्ट के मुताबिक, देश में 2024 के दौरान दुष्कर्म के 29,536 मामले दर्ज हुए। 96.8% में आरोपी पीड़िता का जानकार था। इनमें सबसे ज्यादा 13,879 मामलों में आरोपी दोस्त, ऑनलाइन दोस्त, लिव-इन पार्टनर, शादी का झांसा देने वाला या पति था।
इनमें 28,752 पीड़ित 18 वर्ष या उससे अधिक उम्र की महिलाएं थीं, जबकि 784 पीड़ित 18 वर्ष से कम उम्र की लड़कियां थीं।राजस्थान में सबसे ज्यादा 4,871 मामले दर्ज हुए। इसके बाद उत्तर प्रदेश में 3,209, महाराष्ट्र में 3,091 और मध्य प्रदेश में 3,061 मामले दर्ज हुए।
दुष्कर्म के साथ हत्या के कितने मामले?
एनसीआरबी ने दुष्कर्म या सामूहिक दुष्कर्म के साथ हत्या के मामलों की अलग श्रेणी रखी है। 2024 में देशभर में ऐसे 266 मामले दर्ज हुए और इनमें 274 पीड़ित रहे। मध्य प्रदेश में ऐसे सबसे ज्यादा 50 मामले दर्ज हुए। राजस्थान में 38, महाराष्ट्र में 24, उत्तर प्रदेश में 23 और ओडिशा में 17 मामले दर्ज हुए। दिल्ली में दुष्कर्म या सामूहिक दुष्कर्म के साथ हत्या के छह मामले दर्ज हुए और इनमें सात पीड़ित रहे।
बच्चों से दुष्कर्म के आंकड़े
2024 में देशभर में बच्चों से दुष्कर्म के 979 मामले दर्ज हुए और इनमें 997 बच्चे पीड़ित रहे। उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 459 मामले दर्ज हुए। इसके बाद तेलंगाना में 127, केरल में 81, गुजरात में 65, हिमाचल प्रदेश में 42, महाराष्ट्र में 35 और झारखंड में 33 मामले दर्ज हुए।
दुष्कर्म के कितने मामले लंबित थे?
- एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक, 2024 के अंत तक देशभर में दुष्कर्म के 1,85,785 मामले अदालतों में सुनवाई के लिए लंबित थे।
- इनमें महिलाओं से जुड़े 1,63,247 मामले और लड़कियों से जुड़े 22,538 मामले शामिल थे।
- दुष्कर्म के मामलों में कुल लंबितता दर 89.8 प्रतिशत रही। यानी वर्ष के अंत में सुनवाई के लिए मौजूद करीब 90 प्रतिशत मामले लंबित थे।
सरकार ने महिलाओं के खिलाफ हो रहे अपराध को लेकर क्या बताया?
10 मार्च को लोकसभा में गृह राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार ने महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े नए आपराधिक कानूनों के प्रावधानों की जानकारी दी। सरकार के मुताबिक, भारतीय न्याय संहिता में पहली बार महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों से जुड़े प्रावधानों को प्राथमिकता देते हुए एक ही अध्याय में रखा गया है। गंभीर अपराधों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है।
सरकार ने बताया कि 18 साल से कम उम्र की लड़की के साथ सामूहिक दुष्कर्म के दोषी को उसके प्राकृतिक जीवन के शेष समय तक उम्रकैद या मृत्युदंड दिया जा सकता है। नए कानून में पहले मौजूद अलग-अलग उम्र की नाबालिग पीड़िताओं के लिए सजा के अंतर को खत्म किया गया है।
नए कानून में शादी, नौकरी, पदोन्नति का झूठा वादा करने या पहचान छिपाकर यौन संबंध बनाने को भी अलग अपराध बनाया गया है।
दुष्कर्म के मामलों में पीड़िता का बयान पुलिस द्वारा श्रव्य-दृश्य माध्यम से दर्ज किए जाने का प्रावधान है। जहां तक संभव हो, पीड़िता का बयान महिला मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज करने की व्यवस्था भी की गई है।
सरकार के अनुसार, दुष्कर्म पीड़िता की चिकित्सकीय रिपोर्ट सात दिन के भीतर जांच अधिकारी को भेजना जरूरी है। महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों के पीड़ितों को सभी अस्पतालों में मुफ्त प्राथमिक उपचार और चिकित्सा सुविधा देने का प्रावधान भी बताया गया है।
जांच और न्यायिक प्रक्रिया को तेज करने के लिए सरकार ने ई-समन, ई-साक्ष्य और न्याय-श्रुति जैसी तकनीकी व्यवस्थाओं का भी उल्लेख किया। ई-साक्ष्य के जरिए डिजिटल सबूतों को सुरक्षित और प्रमाणिक तरीके से दर्ज किया जा सकता है, जबकि न्याय-श्रुति के जरिए वीडियो कॉन्फ्रेंस से आरोपियों, गवाहों, पुलिस अधिकारियों और विशेषज्ञों की उपस्थिति कराई जा सकती है।
नए कानून में दुष्कर्म के लिए क्या सजा है?
- 1 जुलाई 2024 से भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) लागू है। इसने पुराने भारतीय दंड संहिता की जगह ली है।
- दोषी को कम से कम 10 साल की कठोर कैद हो सकती है, जिसे उम्रकैद तक बढ़ाया जा सकता है।
- 16 साल से कम उम्र की लड़की से दुष्कर्म पर कम से कम 20 साल की कठोर कैद का प्रावधान है, जो प्राकृतिक जीवन के शेष समय तक उम्रकैद तक बढ़ सकती है।
- 12 साल से कम उम्र की बच्ची से दुष्कर्म पर कम से कम 20 साल की कठोर कैद से लेकर प्राकृतिक जीवन के शेष समय तक उम्रकैद या मृत्युदंड तक का प्रावधान है।
- अगर दुष्कर्म के दौरान पीड़िता की मौत या उसके स्थायी वनस्पति अवस्था में जाने की स्थिति होती है, तो 20 साल से लेकर उम्रकैद या मृत्युदंड तक की सजा हो सकती है।
- सामूहिक दुष्कर्म के मामले में दोषियों को कम से कम 20 साल की कठोर कैद हो सकती है, जो प्राकृतिक जीवन के शेष समय तक उम्रकैद तक बढ़ सकती है।
- भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत दुष्कर्म से जुड़ी निर्धारित धाराओं में पुलिस को एफआईआर दर्ज होने की तारीख से दो महीने के भीतर जांच पूरी करनी होती है।