निर्भया गैंगरेप और हत्या मामले में सुप्रीम कोर्ट ने चार में से तीन आरोपियों की रिव्यू पिटिशन खारिज कर दी है। कोर्ट ने इन दोषियों की मौत की सजा संबंधी दायर समीक्षा याचिका पर फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रखा है। लेकिन अभी भी इन दोषियों के पास खुद को फांसी से बचाने के लिए दो रास्ते हैं। जिनमें से एक है क्यूरेटिव पिटिशन और दूसरा है राष्ट्रपति की दया।
इन दोषी करार दिए गए चार अपराधियों के पास क्यूरेटिव पिटिशन दाखिल करने का विकल्प है। लेकिन अगर सुप्रीम कोर्ट ने यहां भी उनकी पिटिशन खारिज कर दी तो उनके पास आखिरी रास्ता बचेगा। वह रास्ता है राष्ट्रपति के पास दया याचिका भेजने का। अगर राष्ट्रपति उनकी दया याचिका को मान लेते हैं तो उनकी फांसी की सजा को हटाकर उसे उम्रकैद में तब्दील किया जा सकता है। वहीं अगर राष्ट्रपति दया याचिका खारिज कर देंगे तो इनके पास खुद को फांसी से बचाने का कोई और विकल्प नहीं होगा। जिसके बाद इन्हें फांसी दी जाएगी।
भारतीय न्याय व्यवस्था की अंतिम कड़ी है क्यूरेटिव पिटिशन
जब रिव्यू पिटिशन कोर्ट द्वारा खारिज कर दी जाती है तो भारतीय न्याय व्यवस्था के अनुसार दोषियों के पास एक आखिरी रास्ता होता है क्यूरेटिव पिटिशन का। यह अपराधियों के पास खुद को बचाने का आखिरी मौका होता है। इसके द्वारा सजा में रियायत दी जा सकती है। क्यूरेटिव पिटिशन की सुनवाई कोर्ट में ना होकर बंद चेंबर में होती है। यदि इसमें भी दोषी को कोई रियायत ना मिले तो उसके पास आखिरी रास्ता होता है राष्ट्रपति की दया का।
बता दें कोर्ट ने निर्भया मामले के आरोपी पवन, विनय और मुकेश की फांसी की सजा को बरकरार रखा है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि इस मामले में अब दोबारा विचार करने की कोई गुंजाइश नहीं है। बचाव पक्ष के वकील एपी सिंह का कहना है कि उन्होंने पवन और विनय की रिव्यू पिटिशन पर दलील दी थी। साथ ही एक अन्य आरोपी अक्षय की ओर से रिव्यू पिटिशन बाद में दाखिल की गई जिस कारण इस पर दलील नहीं हो पाई। इसके अलावा मुकेश की तरफ से उसके वकील एमएल शर्मा ने रिव्यू पिटिशन पर दलील दी है। अब माना जा रहा है कि जब इन तीनों की पिटिशन खारिज कर दी गई है और इन्हें कोई रियायत नहीं दी गई है तो अक्षय की पिटिशन का भी यही हाल हो सकता है।