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फांसी से आठ दिन पहले निर्भया के गुनहगारों की समीक्षा याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

Sat, 11 Jan 2020 03:46 PM IST
अनवर अंसारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : social media
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निर्भया सामूहिक दुष्कर्म मामले में दोषी विनय शर्मा और मुकेश द्वारा दायर की गई क्यूरेटिव पिटिशन (समीक्षा याचिका) की सुनवाई 14 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की पीठ करेगी।  न्यायमूर्ति एन वी रमणा, न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा, न्यायमूर्ति आर एफ नरीमन, न्यायमूर्ति आर भानुमति और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की पीठ विनय शर्मा और मुकेश की ओर से दायर समीक्षा याचिका पर अपराह्न पौन दो बजे सुनवाई करेगी।

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समीक्षा याचिकाओं पर फैसला न्यायाधीशों के कक्ष में होता है। यह किसी भी व्यक्ति के लिए सजा से बचने का अंतिम न्यायिक रास्ता है। मौत की सजा पाने वाले अन्य दो दोषियों अक्षय और पवन गुप्ता ने समीक्षा याचिका दायर नहीं की है। गौरतलब है कि निचली अदालत ने चारों दोषियों को 22 जनवरी को सुबह सात बजे फांसी देने के लिए मौत का वारंट जारी कर दिया है। जानिए क्या होती है क्यूरेटिव पिटीशन 

क्यूरेटिव पिटीशन एक कानूनी शब्द है। यह तब दाखिल किया जाता है जब किसी दोषी की राष्ट्रपति के पास भेजी गई दया याचिका और सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी जाती है। ऐसे में क्यूरेटिव पिटीशन दोषी के पास मौजूद अंतिम मौका होता है जिसके द्वारा वह अपने लिए निर्धारित की गई सजा में नरमी की गुहार लगा सकता या सकती है।
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क्यूरेटिव पिटीशन किसी भी मामले में कोर्ट में सुनवाई का अंतिम चरण होता है। इसमें फैसला आने के बाद दोषी किसी भी प्रकार की कानूनी सहायता नहीं ले सकता है।

याकूब मेमन मामले में सु्प्रीम कोर्ट ने स्वीकारी थी क्यूरेटिव पिटीशन

1993 के मुंबई ब्लास्ट में दोषी ठहराए गए याकूब मेमन की दया याचिका राष्ट्रपति द्वारा खारिज करने के बाद भी सुप्रीम कोर्ट ने क्यूरेटिव पिटीशन पर सुनवाई करने की मांग स्वीकार की थी। तब सुप्रीम कोर्ट आधी रात तक याकूब की फांसी की आखिरी याचिका पर सुनवाई करता रहा था। हालांकि बाद में उसकी फांसी की सजा को कोर्ट ने बरकरार रखा था।

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किस मामले से आया क्यूरेटिव पिटीशन

सुप्रीम कोर्ट द्वारा दोषी ठहराये जाने के बाद भी दोषी ऐसे मामलों में रिव्यू पिटीशन डाल सकता है। अगर रिव्यू पिटीशन भी खारिज कर दिया जाता है तब सुप्रीम कोर्ट अपने ही द्वारा दिए गए न्याय के आदेश को गलत क्रियान्वन से बचाने के लिए या फिर उसे दुरुस्त करने लिए क्यूरेटिव पिटीशन के तहत सुनवाई कर सकता है।

क्या हैं क्यूरेटिव पिटीशन के नियम

याचिकाकर्ता को अपने क्यूरेटिव पिटीशन दायर करते समय ये बताना जरूरी होता है कि आखिर वो किस आधार पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को चुनौती कर रहा है। क्यूरेटिव पिटीशन किसी सीनियर वकील द्वारा सर्टिफाइड होना जरूरी होता है, जिसके बाद इस पिटीशन को सुप्रीम कोर्ट के तीन सीनियर मोस्ट जजों और जिन जजों ने फैसला सुनाया था उसके पास भी भेजा जाना जरूरी होता है। अगर इस बेंच के अधिकतर जज इस बात से सहमति जताते हैं कि मामले की दोबारा सुनवाई होनी चाहिए तब क्यूरेटिव पिटीशन को दोबारा उन्हीं जजों के पास भेज दिया जाता है।
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