आठ साल पहले आज ही के दिन 16 दिसंबर 2012 को गोरखपुर की एक बेटी निर्भया के साथ छह दरिंदों ने दिल्ली में भयानक वारदात को अंजाम दिया था। लंबी कानूनी प्रक्रियाओं, वकीलों के दांवपेंच से गुजरने के बाद अंततः इसी साल 20 मार्च 2020 को घटना के चार अपराधियों को तिहाड़ जेल में फांसी की सजा दे दी गई।
दुष्कर्म की घटनाओं में बढ़ोतरी पर टिप्पणी करते हुए एडवोकेट भाग्यश्री गोस्वामी ने कहा कि न्याय प्रक्रिया में देरी से अपराधियों को सजा देने का उद्देश्य पूरा नहीं होता है। अगर इस तरह की वारदातों में अपराधियों को जल्द सजा दी जा सके तो इसका समाज पर ज्यादा असर होगा।
वह कहती हैं, महिलाओं के प्रति पुरुषों की पारंपरिक सोच, समाज के ढांचे में हो रहा बदलाव और सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति लोगों में आ रही कमी इसका बड़ा कारण हो सकता है। अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हुई महिलाएं अब इस तरह के मामलों में सामने आकर रिपोर्ट दर्ज करवाती हैं, महिलाओं के प्रति अपराध के आंकड़ों में वृद्धि का यह भी एक प्रमुख कारण है।