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बिटिया को इंसाफ का दिन : राजधानी में दरिंदगी से उबल पड़ा था पूरा देश

Fri, 20 Mar 2020 06:45 AM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • देशभर में विरोध प्रदर्शनों और अदालत की सख्ती के कारण सरकार को बेटियों की सुरक्षा के लिए कानून बनाना पड़ा...
  • सात साल से अधिक की कानूनी लड़ाई और लम्बी जद्दोजहद के बाद आखिर निर्भया के दरिंदों को दी गई फांसी
  • आखिरी दम तक चले गए दांव पर दांव, पर सब बेदम हाईकोर्ट से निचली अदालत तक कहीं नहीं मिली राहत
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Nirbhaya Case - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दिसंबर 2012 की काली रात को देश की राजधानी दिल्ली में जो कुछ हुआ उससे पूरा देश गम और गुस्से से उबल पड़ा। पांच दरिंदों ने फिजियोथेरेपी की छात्रा के साथ बस में बेरहमी से दुष्कर्म किया । इस जघन्य वारदात ने पूरे देश को एकजुट कर दिया और दरिंदों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने के लिए उत्तर से दक्षिण  और पूरब से पश्चिम तक एकसुर से आवाजें उठीं।
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देश के हर हिस्से में बेटियों की सूरक्षा को लेकर लोग चिंतित दिखे। देश भर में हुए जोरदार विरोध प्रदर्शनों और अदालत की सख्ती के कारण सरकार को न केवल बेटियों की सुरक्षा के लिए कानून बनाना पड़ा बल्कि निर्भया फंड भी जारी किया गया। इस फंड से केंद्रीय और राज्य स्तर पर बेटियों की सुरक्षा के लिए तमाम उपाय किए गए।



उत्तर प्रदेश के एक छोटे शहर की रहने वाली पारामेडिकल छात्रा उस रात अपने एक दोस्त के साथ फिल्म देखने गई थी। रात में वापसी के लिए सवारी का इंतजार कर रहे दोनों एक बस में बैठ गए। बस चालक रामसिंह, उसके भाई मुकेश सिंह, पवन गुप्ता, विनय शर्मा, अक्षय ठाकुर और एक नाबालिग ने उसके साथी को मारापीट कर अधमरा कर दिया और निर्भया के साथ दरिंदगी की। उसका इलाज करने वाले डॉक्टरों ने तो यहां तक कहा कि अपने कॅरिअर में इस कदर बेरहमी नहीं देखी। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।  
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उस बेरहम रात की कहानी बयां करते हुए पूर्व फौजी राजकुमार बताते हैं कि दरिंदे सजा के हकदार हैं, उन्हें जरूर फांसी मिलनी चाहिए। कारगिल जंग लड़ चुके राजकुमार बताते हैं कि 16 दिसंबर कर रात को वह कैसे भूल सकते हैं। वह भयावह दृश्य जेहन में आते ही आज भी सिहर उठता हूं और गुस्सा भी आता है। अगर कमजोर दिल वाला उस दृश्य को देखता तो पता नहीं क्या होता। वे बताते हैं, मैं एक टोल प्लाजा कंपनी में काम करता था। रात में करीब साढे़ नौ बजे अपने दो साथियों के साथ बुलेट से पेट्रोलिंग पर निकला था।

बकौल राजकुमार, 10 बजे के करीब पर एयरपोर्ट की ओर जा रहे थे, तब महिपालपुर फ्लाई ओवर के पास बचाओ-बचाओ की आवाज सुनी। जहां से आवाज आ रही थी वहां घायल लड़का दिखा, पास जाने पर निर्भया दिखी। दोनों के शरीर पर कपड़े नहीं थे। राजकुमार और उनके साथियों ने निर्भया को जैकेट और लड़के को अपना शर्ट दिया। पीसीआर को सूचना देने के बाद सड़क की दूसरी तरफ स्थित होटल से बेडशीट लाकर दोनों बच्चों को दिया।

इसी दौरान एक पीसीआर वहां गुजर रही थी, जिसे हाथ देकर रोका। पीसीआर कर्मियों ने बताया उन्हें कॉल नहीं मिली है, लिहाजा हम उन्हें अस्पताल नहीं ले जा सकते। उस  पीसीआर के जाने के बाद फिर पुलिस को कॉल किया। वहां पहुंचे पीसीआर कर्मी उससे नाम-पता पूछने लगे लेकिन राजकुमार ने उन्हें बच्चों को अस्पताल पहुंचाने के लिए कहा। तभी दूसरी पीसीआर वैन आ गई और पुलिसकर्मियों के बीच इलाके को लेकर जिरह होने लगी। राजकुमार ने उनसे हाथ जोड़कर बच्चों को अस्पताल पहुंचाने कीगुहार लगाई और फिर बच्चों को अस्पताल पहुंचाया।

उन्होंने कहा, गुस्सा इस बात को लेकर है कि कानूनी पैतरेबाजी से दरिंदे लंबे समय तक बचते रहे। हालांकि यह संतोष की बात है कि उनकी सारी पैंतरेबाजी नाकाम रही और अब उन्हें अपने किए की सजा मिलेगी। इससे निर्भया, समाज और उसके मां-बाप को न्याय मिलेगा। कानून पर भरोसा बढ़ेगा। देरी जरूर हुई है, लेकिन इंसाफ होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हम मदद नहीं करते तो कोई दूसरा करता। इंसानियत मरी नहीं है।
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ये हैं निर्भया के गुनहगार

  • अक्षय ठाकुर : बिहार का रहने वाला। उम्र  32 साल। शादीशुदा। एक बेटे का पिता
  • मुकेश सिंह : राजस्थान का रहने वाला। उम्र 24 साल। मुख्य अभियुक्त रामसिंह का भाई।
  • विनय शर्मा  : उम्र 24 साल। जिम सहायक। रविदास झुग्गी बस्ती का निवासी। चारो में थोड़ा पढ़ा लिखा।
  • पवन गुप्ता : उम्र 23 साल। फल विक्रेता। विनय शर्मा का दोस्त
  • (मुख्य अभियुक्त रामसिंह ने तिहाड़ में आत्महत्या कर ली थी।)

बस नंबर 0149 देख आज भी आता है गुस्सा

दुष्कर्म कांड में इस्तेमाल की गई यादव ट्रैवल्स की बस नंबर 0149 को देखकर लोग आज भी गुस्से से भर जाते हैं।  निर्भया केस के जांच अधिकारी अनिल शर्मा समेत अन्य पुलिसकर्मियों का कहना है कि बस को देखते हैं तो शरीर में आग लग जाती है। इस बस को सागरपुर स्थित पिट में छिपाकर रखा हुआ है। वारदात के दो साल तक इस वर्ष को त्यागराज स्टेडियम व वसंत विहार में कई जगहों पर छिपाकर रखा गया था।

स्कूल में लगी हुई थी बस

एसआईटी के सदस्य रहे और इस समय एसीपी द्वारका राजेन्द्र सिंह ने बताया कि बस का मालिक दिनेश यादव है। बस सुबह व शाम के समय दिल्ली से नोएडा सवारी लेकर जाती थी। इसके अलावा बस बिड़ला विद्या निकेतन स्कूल में लगी हुई थी।
 

पौन घंटे तक हुई थी निर्भया से दरिंदगी

आरोपी करीब पौन घंटे तक छात्रा के साथ दरिंदगी करते रहे। आरोपियाें ने छात्रा के दोस्त के सिर पर रॉड मार दी, इससे वह अचेत हो गया। आरोपी बस को एनएच-8 पर घुमाते रहे थे और ये बस को महिपालपुर की तरफ दो बार ले गए थे।  दरिंदों ने दोनों को बस से नीचे फेंकने के बाद कुचलने की भी कोशिश की थी।
 

उधर सीमा विवाद में उलझी रही पुलिस

निर्भया मामले में एफआईआर दर्ज करने को लेकर मामला तीन थानों के सीमा विवाद में उलझ गया था। इस कारण एफआईआर डेढ़ से दो घंटे लेट से दर्ज हुई थी। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद वसंत विहार थाने में मामला दर्ज हुआ। एनएच-8 पर जिस जगह पर निर्भया व उसका दोस्त पड़ा मिला था।

वह जगह दिल्ली कैंट थाना इलाके में है। जब 100 नंबर पर सूचना दी गई तो यह कॉल दिल्ली कैंट थाने को दी गई । बाद में इलाका वसंत कुंज (नार्थ) थाना इलाके का निकला।
 
 
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