Nirbhaya Rape Case
पहले दरिंदों, फिर व्यवस्था की हुई शिकार...
....और जैसे यह काफी नहीं था तो मुझे न्याय दिलाने को लड़ रहे मेरे मां-पापा अब न्यायिक और कानूनी पेचीदगियों की हैवानियत के शिकार बन रहे हैं।
कौन हूं मैं, क्या आपको याद है...
भले ही मैं अब आप लोगों के बीच नहीं, लेकिन आज भी रोज अन्याय का जहर पी रही हूं। अरे, आप लोग तो मुझे भूल गए होंगे। मैं निर्भया हूं। आप ही लोगों ने तो मुझे यह नाम दिया था। वही निर्भया जिसके साथ छह लोगों ने 16 दिसंबर 2012, रविवार की रात चलती बस में हैवानियत की थी।
आंखों से आंसू गिर रहे हैं। गला भरा है। आवाज नहीं निकल रही। फिर भी मैं आपके लिए उस भयावह काली रात को दोहराती हूं। दोस्त के साथ उस रात फिल्म देखने के बाद मुनिरका से द्वारका जाने वाली बस में बैठी थी। बस में हम दोनों के अलावा छह लोग थे। कुछ समझ पाती इससे पहले ही सभी ने मेरे साथ छेड़छाड़ शुरू कर दी। दोस्त ने बीच-बचाव किया तो उसे बुरी तरह पीटकर बेहोश कर दिया।