निपाह के मरीजों का इलाज करने वाले स्टाफ और मरीजों से संपर्क करने वाले लोगों को सुझाव दिया गया है कि वह उनसे उचित दूरी बनाए रखें। तेजी से फैलने वाले इस संक्रमण से बचने के लिए सरकार भी हर संभव कदम उठा रही है। वहीं मामले पर कोझिकोड के कई अस्पतालों का कहना है कि लोग डरे हुए हैं। जिस वजह से वह ऐसी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
समाजशास्त्री ने कहा- जागरुकता की है जरूरत
समाजशास्त्री बेबी शेरीन ने कहा, 'इस समय जागरुकता बढ़ाने के साथ लोगों को निपाह के मरीजों के सीधे या अप्रत्यक्ष संपर्क में आने से मना किया गया है। इसके साथ ही कई तरह की गलत सूचनाएं भी फैलाई जा रही हैं। लोग अपनी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की बजाय मरीजों को नजरअंदाज करना ज्यादा आसान समझ रहे हैं।'
कोझिकोड जिले के मेडिकल अफसर डॉ. जयश्री वासुदेवन का कहना है कि इस बीमारी के प्रति जागरुकता फैलाने की जरूरत है। वहीं अन्य समाजशास्त्रियों का कहना है कि लोगों के डर की वजह से ऐसी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। लोग खुद को और अपने परिवार को वायरस से बचाने की कोशिश कर रहे हैं।