विदेश में रह रहे भारतीय मूल के लोगों की हिंदी सीखने की इच्छा अब अधूरी नहीं रहेगी। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की योजना के तहत राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (एनआईओएस) आरंभिका नामक ऑनलाइन पाठ्यक्रम जल्द ही शुरू करने जा रहा है। बीते 15-17 फरवरी के बीच फिजी में आयोजित विश्व हिंदी सम्मेलन में विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर व फिजी के राष्ट्रपति रातु विलियम मायवालिली कातोनिवे ने इसका उद्घाटन (लॉन्च) किया था।
विदेश में रह रहे भारतीय मूल के लोगों को उनकी मातृभाषा सिखाने के उद्देश्य से आरंभिका पाठ्यक्रम को तैयार किया गया है, जो ऑनलाइन होगा। इसके केंद्र में भले ही प्रवासी भारतीय हों लेकिन पाठ्यक्रम का लाभ हिंदी सीखने के इच्छुक हर किसी व्यक्ति को मिलेगा। प्रवासी भारतीयों के साथ ही देश के लोग भी ऑनलाइन हिंदी सीख सकेंगे।
किताब के रूप में कोर्स तैयार
एनआईओएस की एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अभी किताब के फॉर्म में कंटेंट व कोर्स तैयार हो गया है। पूरा कंटेंट एनआईओएस ने ही तैयार किया है। कंटेंट को अंतिम रूप देने के बाद इसके चैप्टर तैयार किए जाएंगे। चैप्टर फाइनल होने के बाद उसे लेखन के लिए दे दिया जाएगा, फिर उसे एनआईओएस की साइट पर ऑनलाइन कर दिया जाएगा।
देश की सभ्यता संस्कृति की मिलेगी जानकारी
आरंभिका कोर्स के बाद प्रवासी भारतीय न सिर्फ हिंदी में सामान्य बाचतीच करने में सक्षम होंगे बल्कि उन्हें भारत के रहन-सहन, कला संस्कृति, वेषभूषा व देश के बारे में अन्य जानकारियां मिल सकेंगी। संवाद शैली में तैयार किया गया यह पाठ्यक्रम प्रवासी भारतीयों के साथ ही वहां के नागरिकों को भी भारत से जुड़ने का अवसर प्रदान करेगा। प्रवासी भारतीयों को हिंदी सिखाने में एनआईओएस के साथ ही प्रवासी भारतीय अध्ययन केंद्र की भूमिका भी अहम है, जो भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रचार-प्रसार के लिए काम कर रहा है।
दीप पुस्तकालय भी सहायक
एनआईओएस की तरफ से दीप नामक ऑनलाइन लाइब्रेरी की भी शुरुआत की गई है, जिसका अपने देश के लोगों के साथ ही प्रवासी भारतीयों को खासा लाभ मिल रहा है। एनआईओएस के डिजिटल पुस्तकालय दीप में 5,000 हिंदी पुस्तकें, पत्रिकाएं और जर्नल उपलब्ध हैं और यह सामग्री पढ़ने-पढ़ाने के लिए निशुल्क रूप से उपलब्ध है।