1990 से 2015 के बीच, विश्व के 15-24 साल के युवाओं में साक्षरता दर के स्तर में काफी सुधार हुआ है। जहां पहले यह दर 83 फीसदी थी, वहीं अब यह बढ़कर 91 फीसदी हो गई है। पूरे विश्व में करीब 5.7 करोड़ बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। इनमें से आधे बच्चे अफ्रीका के सब सहारा रीजन में रहते हैं।
2030 तक के लिए जारी 'सतत विकास लक्ष्य अभियान' का टारगेट सभी लड़के और लड़कियों को प्राइमरी और सेकेंडरी स्तर की शिक्षा के साथ ही टेक्नीकल/वोकेशनल शिक्षा की गारंटी देना है। इसके लिए पॉलिसी में हस्तक्षेप करना होगा, जिससे ऐसा करने के लिए पहुंच बने और गुणवत्ता में सुधार हो।
यह करने के लिए सभी तरह की बाधाओं को भी देखना पड़ेगा जिनमें लैंगिक असमानता, खाद्य असुरक्षा और सशस्त्र लड़ाई शामिल हैं।
प्राइमरी लेवल पर है लड़कियां 100 फीसदी साक्षर
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प्राथमिक स्तर पर दिखी लड़के-लड़कियों की ज्यादा उपस्थिति
भारत में प्राथमिक शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए काफी काम हुआ है। इनमें लड़कियों की प्राथमिक स्तर तक स्कूलों में उपस्थिति व पढ़ाई पूरी करना शामिल है। 2013-14 तक देश में प्राथमिक स्तर पर लड़के और लड़कियों की स्कूलों में उपस्थिति 88 फीसदी तक रही थी।
भारत सरकार के सर्व शिक्षा अभियान का भी यही उद्देश्य है कि सभी भारतीयों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले। सरकार इसके लिए शिक्षकों की ट्रेनिंग, उच्च शिक्षा और पोषण का समर्थन करके पूरा करने में लगी हुई है।
22 फीसदी लड़कियां प्राप्त कर पाती हैं उच्च शिक्षा
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भारत में ऐसे हो रहा है शिक्षा का सतत विकास
भारत में इस समय 73 फीसदी वयस्क शिक्षित हैं, जिनमें 58 प्रतिशत ग्रामीण इलाकों के हैं। दिव्यांगों में साक्षरता दर 54 फीसदी है, जबकि 34 फीसदी दिव्यांग बच्चे स्कूली शिक्षा प्राप्त नहीं कर पाते हैं।
देश में 100 फीसदी लड़कियां प्राथमिक स्तर पर स्कूल तो जा रही हैं, लेकिन 22.7 फीसदी ही उच्च शिक्षा प्राप्त कर पाती हैं।
भारत में 36 करोड़ युवा हैं, जो कि विश्व में सबसे ज्यादा हैं। लेकिन इनमें से केवल 23 फीसदी ही उच्च शिक्षा ग्रहण कर पाते हैं। देश के युवाओं की बात करें तो 92 फीसदी महिलाएं और 94 फीसदी पुरुष साक्षर हैं, जबकि पूरे विश्व में साक्षरता दर 91 फीसदी है।