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एक लक्ष्य पाकर दूसरे लक्ष्य की ओर बढ़ें छात्र: आशीष विद्यार्थी

Mon, 13 Nov 2017 04:36 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला
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फिल्म अभिनेता आशीष विद्यार्थी 
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देश भर से विभिन्न क्षेत्रों में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुके नौ चुनिंदा शख्सियतों के साथ उत्तर भारत का दूसरा ‘टेडएक्स‘ कार्यक्रम जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा में शानदार तरीके से आयोजित किया गया। कार्यक्रम में साइबर सिक्योरिटी, व्यापार, वैश्विक विषयों से लकर आध्यात्म जैसे विषयों पर विभिन्न क्षेत्रों में उनके द्वारा किये जा रहे कार्यों को प्रभावशाली एवं शक्तिशाली माध्यम से व्यक्त किये। 
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फिल्म अभिनेता आशीष विद्यार्थी ने अपने संवाद में कहा कि किस प्रकार दूसरे हमें जीवन में फोकस करने को कहते हैं। किसी की विफलता पर हम कहते हैं कि अगर व्यक्ति ने अपने लक्ष्य पर फोकस नहीं किया तो लक्ष्य पाना नामुमकिन है। जो व्यक्ति लक्ष्य पर फोकस करते हैं उन्हें अपनी मंजिल भी दिख रही होती है तभी कुछ ऐसा हो जाता है, जिसकी उस व्यक्ति ने कभी कल्पना भी न की हो। इसके बाद व्यक्ति को लक्ष्य मिल जाता है, लेकिन व्यक्ति उसी लक्ष्य पर चलता रहता है और फिर आगे के लक्ष्य के लिए कुछ सीखने की भी कोशिश नहीं करता है। ऐसा नहीं होना चाहिए। लक्ष्य मिल जाने के साथ-साथ हमें दूसरे अवसरों का भी ध्यान रखना चाहिए और कुछ सीखना चाहिए। 

साइबर सिक्योरिटी विशेषज्ञ राहुल त्यागी ने बताया कि किस प्रकार आज के तकनीक का अधूरा ज्ञान हमारे लिए घातक है। आज के समय प्रत्येक व्यक्ति के पास स्मार्ट फोन है, लेकिन वह उससे पूर्ण रूप से परिचति नहीं है। विशेषज्ञ राहुल त्यागी ने कार्यक्रम के मध्य में एक व्हाट्सएप हैक करके भी छात्रों को दिखाया। साथ ही साथ दूसरे कम्प्यूटर को भी बिना हाथ लगाए हैक किया। उन्होंने अपने संवाद में वर्ष 2017 के कुछ साइबर अपराधों के बारे में भी छात्रों को जानकारी दी। उन्होंने छात्रों को इस अपराध से दूर रहने के लिए कहा कि तकनीक के बारे में पूर्ण ज्ञान अतिआवश्यक है।  
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रसोईया हरपाल सिंह सोखी ने मां और उसके पकाये खाने का बहुत अधिक महत्व बताया। उन्होंने बताया कि एक सफलता के पीछे अच्छे खाने की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसके लिए हमें अपनी मां का आभारी होना चाहिए। साथ ही उन्होंने बताया कि किस प्रकार उनका संगीत ‘नमक शमक‘ लोकप्रिय बना। अपने संवाद के अंत में उन्होंने छात्रों को कहा कि सभी खाना खाकर अपनी मां को शुक्रिया कहें और उनकी मदद के लिए आगे आएं। 

राजनैतिक कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी ने बताया कि सोशल मीडिया की वजह से यादें छोटी होती जा रही हैं। कैसे बहुत से व्यक्ति आज दोहरे व्यक्तित्व को जी रहे हैं। किसी वस्तु को महसूस करने के बजाय व्यक्ति उस वस्तु को कैमरे में कैद करना चाहता है। जीवन को दो कमरों में बांट दिया है, एक शीशे का कमरा है, जिसमें सभी खुशियां, सफलताएं हैं। एक है अंधेरी चार दिवारी का कमरा जिसने आपने दुःख, निराशा और असफलता को छुपा रखा है। उन्होंने कहा कि अब न खुशियों का आभास है न दुःखों को महसूस करने का। बस तेजी से जीवन में आगे बढ़ते जा रहे हैं। 
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दूरसंचार विशेषज्ञ रोहित सेठी ने बताया कि किसी भी समस्या का समाधान तभी होगा जब उस समस्या को आगे बढ़कर सोचा जाएगा। यह छात्रों को लक्ष्य की ओर अग्रसर करता है। समस्याएं आती हैं और यह स्वाभाविक है। यह छात्रों पर निर्भर करता है कि कैसे उनका समाधान करते हैं। इसके लिए छात्रों को हर समस्या को एक सकारात्मक भाव से देखना होगा। 

रोबिन हूड संस्था के सदस्य संचित जैन ने छात्रों को बताया कि अपने लिए तो सभी जीते हैं, किसी गरीब, भूखे को भोजन देना एक अलग ही जीना है। उन्होंने छात्रों को बताया कि शुरुआती दौर में वह सिर्फ 7 लोगों के साथ रेस्टोरेंटों से बचा हुआ खाना एकत्र कर जरूरतमंदों को बांटते थे। अब इसी मुहिम में 12 हजार से अधिक लोग जुड़ गए हैं। उन्होंने छात्रों को बताया कि छात्र अपनी पढ़ाई या नौकरी के साथ-साथ दूसरों के लिए भी कुछ करने के लिए सक्षम हों। इससे दूसरों को तो मदद मिलेगी ही साथ ही खुद को भी समृद्धि मिलेगी। 

अनुभवी  ई-कॉमर्स व्यवसायी मोहित श्रीवास्तव ने छात्रों को बताया कि तीसरी औद्योगिक क्रांति पूर्ण हो चुकी है और अब चौथे औद्योगिक क्रांति की ओर बढ़ रहे हैं। अब हमारे पास कम्प्यूटर है जिससे हम जानकारी का आदान-प्रदान करते हैं। आने वाले समय में 2025 तक इंटरनेट सभी के लिए मानवाधिकार बनकर कार्य करेगा और स्टोरेज पूर्ण रूप से मुफ्त हो जाएगा। यह तभी संभव है जब एक दूसरे के प्रति विश्वास स्थापित हो। 

गैर लाभकारी संगठन के संस्थापक एवं कलाकार निमिशा वर्मा ने छात्रों को बताया कि उन्होंने अपने सपनों को पूरा करने के लिए मात्र 19 वर्ष की आयु में घर छोड़ दिया था। बहुत ही कठिन परिस्थितियों से गुजरते हुए मंजिल हासिल की और अब वह दूसरों को प्रोत्साहित कर उनकी मदद करती हैं।

प्रेरक वक्ता विराली मोदी ने अपने जीवन से कुछ उदाहरण देते हुए बताया कि किस प्रकार भिन्न क्षमता वाले व्यक्ति को हीन भाव से देखा जाता है। 

इस मौके पर प्रणव सिन्हा, ऋषभ श्रीवास्तव, प्रभांकर त्रिपाठी, शरद पाल, सिद्धार्थ वाजपेयी, ऋषभ सोवनी, सक्षम, प्रशांत श्रीवास्तव आदि का कार्यक्रम में सहयोग रहा। विश्वविद्यालय के डॉ. मनोज चौबे ने सभी छात्रों का आभार व्यक्त किया। 
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