नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) ने सोमवार को आईएलएंडएफएस के चेयरमैन और वाइस चेयरमैन समेत नौ पूर्व निदेशकों से संपत्ति का खुलासा करने को कहा है। साथ ही वे अगली सुनवाई तक संपत्ति को बेच या गिरवी नहीं रख पाएंगे।
कोर्ट ने तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 16 जनवरी, 2019 को होगी। हालांकि कोर्ट ने सरकार को पूर्व निदेशकों के खाते फ्रीज करने की इजाजत नहीं दी है।
एनसीएलटी की मुंबई बेंच के जज वीपी सिंह और रविकुमार दुरईसामी ने कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के ताजा हलफनामे पर यह अंतरिम आदेश दिया है। मंत्रालय ने आईएलएंडएसएफ ग्रुप के पूर्व निदेशकों के खाते फ्रीज करने की इजाजत मांगी थी।
सोमवार को दायर हलफनामे में मंत्रालय ने छह पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों के नाम शामिल किए हैं। गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसएफआईओ) की अंतरिम रिपोर्ट के बाद यह हलफनामा जरूरी थी। एसएफआईओ ने अपनी रिपोर्ट में प्रबंधन द्वारा धोखाधड़ी की गतिविधियों को हवाला दिया था। गौरतलब है कि सरकार ने 1 अक्तूबर को आईएलएंडएसएफ का अधिग्रहण कर लिया था।
इन अधिकारियों को बतानी होगी संपत्ति
एनसीएलटी ने आईएलएंडएसएफ के पूर्व चेयरमैन रवि पार्थसारथी, पूर्व वाइस चेयरमैन और प्रबंध निदेशक हरि शंकरन, कंपनी सचिव अरुण के साहा, पूर्व प्रबंधन निदेशक रमेश चंदर बावा के अलावा के. रामचंद्रन, प्रदीप पुरी, एस. रंगराजन, मुकुंद सप्रे और वैभव कपूर को संपत्ति का खुलासा करने को कहा है।