सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार को वर्ष 2002 से 2006 के बीच राज्य में हुए कथित एनकाउंटर मामलों की निगरानी समिति की अंतिम रिपोर्ट पर जवाब देने के लिए एक हफ्ते का वक्त दिया है। यह कमेटी शीर्ष अदालत द्वारा बनाई गई थी।
सुप्रीम कोर्ट वर्ष 2007 में पत्रकार बीजी वर्गीज व गीतकार जावेद अख्तर द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है। याचिका में किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की गुहार लगाई गई थी। वर्ष 2014 में वर्गीज का निधन हो गया था। याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत भूषण ने सोमवार को चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ से कहा कि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज एचएस बेदी की अध्यक्षता में गठित निगरानी कमेटी ने पिछले दिनों फाइनल रिपोर्ट दाखिल की है। अब इस पर अंतिम सुनवाई होनी चाहिए।
वहीं, गुजरात सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि रिपोर्ट पर जवाब दाखिल करने के लिए एक-दो हफ्ते का वक्त दिया जाए। जिस पर पीठ ने राज्य सरकार को जवाब देने के लिए एक हफ्ते का वक्त देते हुए सुनवाई 12 दिसंबर तक के लिए टाल दी।
ऐसे मामलों की जल्द सुनवाई क्यों करें : चीफ जस्टिस
प्रशांत भूषण की दलील पर चीफ जस्टिस ने कहा कि बड़ी संख्या में मामले लंबित हैं। फांसी के मामले भी लंबित है, जिनपर जल्द सुनवाई की जरूरत है। ऐसे में हमें इस तरह के मामले पर क्यों सुनवाई करनी चाहिए। जवाब में भूषण ने कहा कि ये मामले तो महत्वपूर्ण हैं, लेकिन उनका मामला भी महत्वपूर्ण है।