गुजरात सूचना आयोग ने बार-बार आरटीआई (सूचना का अधिकार) दायर करके अधिकारियों को 'परेशान' करने आरोप में नौ लोगों को ब्लैकलिस्ट किया है। आयोग ने आदेश दिया है कि उनके आवेदनों का अब से जवाब न दिया जाए।
पिछले दो वर्षों में सूचना आयुक्तों के आदेशों का विश्लेषण करने वाले एक एनजीओ ने दावा किया कि गुजरात में यह पहला अवसर है जब लोगों को जानकारी मांगने पर आजीवन प्रतिबंधित कर दिया गया है।
आयोग ने कहा कि ये नौ व्यक्ति आरटीआई एक्ट का बार-बार उपयोग कर रहे थे। आरटीआई आवेदन दाखिल करके अधिकारियों को परेशान कर रहे थे। दुर्भावनापूर्ण इरादों के साथ सवाल दर्ज कर रहे थे।
आणंद जिले के हितेश पटेल पर पांच हजार रुपये का जुर्माना
गुजरात सूचना आयोग ने इन नौ व्यक्तियों के अलावा आणंद जिले के पेटलाड शहर के हितेश पटेल को भी पांच साल के लिए आरटीआई आवेदन दाखिल करने से रोक दिया है और उस पर 'आरटीआई अधिनियम का दुरुपयोग' करने के लिए पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
एनजीओ की पंक्ति जोग ने दावा किया कि गुजरात में यह पहली बार है कि लोगों को सूचना मांगने से आजीवन प्रतिबंधित कर दिया गया है, इस तथ्य के बावजूद कि आरटीआई एक्ट के तहत आवेदकों को ब्लैक लिस्ट में डालने का कोई प्रावधान नहीं है। यहां तक केंद्रीय सूचना आयोग ने भी एक क्वेरी का जवाब देते हुए कहा कि ऐसा कोई प्रावधान नहीं है।
गुजरात सूचना आयोग के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखाएंगे : जोग
जोग ने कहा कि ये सभी दस व्यक्ति (ब्लैकलिस्ट किए गए नौ व्यक्ति और पटेल) गुजरात सूचना आयोग के आदेश को चुनौती देने के लिए गुजरात हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं।
सूचना आयुक्तों ने अपने आदेश में इन सभी मामालों से संबंधित अधिकारियों से कहा है कि यदि वे अब से आरटीआई आवेदन दायर करते हैं तो कोई जानकारी न दें।