साल 2008 में हुए मालेगांव धमाके मामले में जांच एजेंसी एनआईए और महाराष्ट्र सरकार के बीच टकराव की स्थिति बन रही है। इसे लेकर अब महाराष्ट्र सरकार ने कहा है कि वह एटीएस की तरफ से वकील नियुक्त करेगी। इस मामले में गवाहों के लगातार पलटने की वजह से हालात नया मोड़ ले रहे हैं।
महाराष्ट्र के गृह मंत्री दिलीप वलसे ने कहा कि इसकी जांच एनआईए के हवाले है और वह इसकी निगरानी कर रही है। गवाहों के मुकर जाने से महाराष्ट्र सरकार चिंतित है। इसलिए हमने अपना वकील देने के बारे में सोचा है। एटीएस की ओर से महाराष्ट्र सरकार सुनवाई के दौरान अदालत में पेश होगी।
गवाह ने कहा था, सीएम योगी का नाम लेने पर किया गया मजबूर
28 दिसंबर 2021 को विशेष एनआईए अदालत में एक गवाह ने कहा है कि उसे एटीएस और बाद में मामले की जांच करने वाली एजेंसी ने प्रताड़ित किया था। उसने यह भी बताया कि एटीएस ने उसे इस मामले में योगी आदित्यनाथ और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के चार अन्य लोगों का झूठा नाम लेने के लिए मजबूर किया था।
एटीएस ने जब मालेगांव बम धमाका मामले की जांच की थी तब मुंबई पुलिस के पूर्व आयुक्त परमबीर सिंह इसके अतिरिक्त आयुक्त के पद पर तैनात थे। परमबीर सिंह इस समय भ्रष्टाचार और वसूली के कई मामलों का सामना कर रहे हैं। मामले की जांच एनआईए के अपने हाथों में लेने से पहले इस गवाह का बयान जांच करते समय एटीएस ने दर्ज किया था।
गवाह ने बताया कि एटीएस के परमबीर सिंह और अन्य अधिकारियों ने मुझे योगी आदित्यनाथ और इंद्रेश कुमार समेत आरएसएस के चार नेताओं का नाम लेने के लिए धमकाया था। उसने दावा किया कि एटीएस ने मुझे प्रताड़ित किया और गैरकानूनी तरीके से एटीएस कार्यालय में बैठाया था। मामले में अब तक 220 गवाहों से पूछताछ हो चुकी है और उनमें से 15 मुकर गए हैं।
ले. कर्नल पुरोहित ने की थी बंद कमरे में सुनवाई की मांग
इससे पहले मालेगांव धमाका मामले में आरोपी लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित ने विशेष अदालत में आवेदन दायर कर मामले की सुनवाई बंद कमरे में करने की अपील की थी। पुरोहित ने कहा कि न्याय के हित में मामला अदालत के कक्ष तक ही सीमित रहना चाहिए।
अपने आवेदन में पुरोहित ने कहा कि अदालत के 2019 के आदेश का मीडिया उल्लंघन कर रहा है। इसलिए मुकदमे को कवर करने की अनुमति को पूरी तरह से वापस लिया जाए। आवेदन में कहा गया है कि राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने 2019 में अदालत के समक्ष दिए गए ऐसे ही एक आवेदन में मुकदमे की सुनवाई बंद कमरे में आयोजित करने और मीडिया को रिपोर्टिंग की इजाजत नहीं देने का अनुरोध किया था।