साल 2019 के रामलिंगम हत्याकांड में एक और बड़ी सफलता हासिल करते हुए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने दो फरार घोषित अपराधियों को दबोचा है। ये दोनों आरोपी, सात वर्ष से फरार थे। इन्हें भगोड़ा घोषित किया गया था। राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने इस क्रूर हत्याकांड में शामिल हमलावरों के तीन शरणदाताओं को भी गिरफ्तार किया है।
बता दें कि रामलिंगम की हत्या 5 फरवरी 2019 को तमिलनाडु के तंजावुर में की गई थी। इस हत्याकांड को कथित तौर पर प्रतिबंधित पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के सदस्यों द्वारा अंजाम दिया गया था। तमिलनाडु के तंजावुर जिले के मूल निवासी मोहम्मद बुरहानुद्दीन और मोहम्मद नबील हसन पिछले लगभग 7 वर्षों से फरार घोषित अपराधी (पीओ) थे। उन्हें एनआईए को सहयोगी एजेंसियों से मिली सूचनाओं के आधार पर वेल्लोर जिले के पल्लिकोंडा से पकड़ा गया है।
तंजावुर जिले के पीएफआई सदस्यों में से इन दोनों ने कई अन्य लोगों के साथ मिलकर रामलिंगम की हत्या करने की साजिश रची और समन्वय किया। इस हत्याकांड में उन्होंने रामलिंगम के हाथ काट दिए थे। उनकी गिरफ्तारी के बाद, एनआईए ने बुधवार को इस मामले में शामिल तीन और लोगों को भी गिरफ्तार किया है। चेन्नई जिले के रहने वाले के. मोहिदीन, मोहम्मद इमरान और थमीम अंसारी, हत्या के बाद फरार आरोपियों को छिपाने और उन्हें एक जगह से दूसरी जगह ले जाने में मदद करने के दोषी पाए गए।
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एनआईए ने 7 मार्च 2019 को तिरुविदैमरुथुर पुलिस से यह मामला अपने हाथ में लिया था। इस मामले में अगस्त 2019 में आरोपपत्र दाखिल किया गया था। बाद में छह आरोपियों को फरार घोषित कर दिया गया। उनकी गिरफ्तारी पर 5 लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था। इस केस में अभी तक पांच फरार आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। एक आरोपी मोहम्मद अली जिन्ना अभी भी फरार है।