एलगार परिषद मामले के आरोपी व तेलुगु कवि वरवरा राव को विशेष एनआईए कोर्ट ने मोतियाबिंद के ऑपरेशन के लिए हैदराबाद जाने की इजाजत देने से इनकार कर दिया। वे तीन माह के लिए मुंबई से हैदराबाद जाना चाहते थे।
मुंबई की विशेष एनआईए कोर्ट ने राव से कहा कि वह अगले तीन माह में उनके खिलाफ आरोप तय करने वाली है। विशेष जज राजेश कटारिया ने कहा कि कोर्ट को आरोपी के खिलाफ आरोप तय करना है। यदि राव को तीन महीने के लिए हैदराबाद जाने और रहने की अनुमति दी जाती है तो आरोप तय करने में लंबा वक्त लग जाएगा। ऐसे में उनकी अर्जी पर अनुमति देना उचित नहीं होगा।
वरवरा राव फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से जमानत पर हैं और जमानत शर्तों के अनुसार उन्हें एलगार परिषद केस की सुनवाई तक मुंबई में ही रहना होगा। कोर्ट में मामले की सुनवाई अभी शुरू नहीं हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने राव को 10 अगस्त को चिकित्सा आधार पर जमानत दी थी। इसके साथ मोतियाबिंद सर्जरी के लिए हैदराबाद जाने की इजाजत के लिए उन्हें एनआईए कोर्ट जाने को कहा गया था।
राव के वकील नीरज यादव ने एनआईए कोर्ट से कहा कि राव मार्च 2021 से मुंबई में रह रहे हैं। मुंबई में रहने का खर्च बहुत अधिक है। राव को वर्ष 2021 में जीवन यापन पर 68 हजार रुपये प्रति माह खर्च करना पड़े। ये खर्च अब बढ़कर 70 से 80 हजार रुपये प्रति माह हो गया है। अब तक करीब 10 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं।
यादव ने कहा कि राव को तेलंगाना सरकार से केवल 50 हजार रुपये महीना पेंशन के रूप में मिलते हैं। मुंबई में रहने के लिए अतिरिक्त खर्च के कारण राव को को दूसरों से पैसे उधार लेने पड़ते हैं। वे मुंबई में मोतियाबिंद सर्जरी का खर्च उठाने में असमर्थ हैं। तेलंगाना में उनका मुफ्त ऑपरेशन किया जाएगा।
एनआईए की ओर से पेश विशेष लोक अभियोजक प्रकाश शेट्टी ने राव की याचिका का विरोध किया। शेट्टी ने कहा कि राव की मोतियाबिंद सर्जरी मुंबई में हो सकती है। राव यहां भुगतान किए जाने वाले उपचार शुल्क की प्रतिपूर्ति प्राप्त कर सकते हैं।
एनआईए का आरोप है कि 21 दिसंबर, 2017 को पुणे में भाकपा माओवादी के प्रमुख संगठनों द्वारा आयोजित एलगार परिषद में वक्ताओं ने भड़काने वाले भाषण दिए थे, इसके अगले दिन भीमा कोरेगांव में हिंसा भड़की थी, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए थे।