पुलिस को सूचना मिली थी कि अजहरुद्दीन और उसका साथी प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन आईएसआईएस की विचारधारा का प्रचार कर रहे हैं। इनका उद्देश्य दक्षिण भारत, खासकर केरल और तमिलनाडु में आतंकवादी हमले करने के लिए युवाओं की भर्ती करना था।
एनआईए की एक अदालत ने खूंखार आतंकवादी समूह इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया (आईएसआईएस) की विचारधारा को बढ़ावा देने के दोषी युवकों को आठ-आठ साल कठोर कारावास की सजा सुनाई है। दोषी पाए गए दोनों युवक तमिलनाडु के कोयंबटूर के निवासी हैं। दोषियों पर आतंकी संगठन के लिए लोगों की भर्ती करने और आंतकी संगठन का प्रचार करने के भी आरोप हैं।
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इन धाराओं में सुनाई गई सजा
एनआईए मामलों की सुनवाई करने वाली विशेष अदालत ने तमिलनाडु के कोयंबटूर के उक्कदम स्थित अंबु नगर निवासी मुहम्मद अजहरुद्दीन (27) और दक्षिण उक्कदम निवासी शेख हिदायतुल्ला उर्फ फिरोज खान (35) को दोषी ठहराया। उन्हें भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 120बी (षड्यंत्र रचने), गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) की धारा 38 (आतंकवादी संगठन की सदस्यता) और धारा 39 (आतंकवादी संगठन का समर्थन) के तहत दंडनीय अपराधों का दोषी पाया गया। अदालत ने इन सभी अपराधों में प्रत्येक में आठ-आठ साल कैद की सजा सुनाई। हालांकि, सभी सजा साथ-साथ चलेंगी।
श्रीलंका में ईस्टर के दिन हुए बम विस्फोटों के बाद शुरू की गई जांच
यह मामला साल 2019 में तब दर्ज किया गया था जब पुलिस को सूचना मिली थी कि अजहरुद्दीन और उसका साथी प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन आईएसआईएस की विचारधारा का प्रचार कर रहे हैं। इनका उद्देश्य दक्षिण भारत, खासकर केरल और तमिलनाडु में आतंकवादी हमले करने के लिए युवाओं की भर्ती करना था। यह जांच अप्रैल 2019 में श्रीलंका में ईस्टर के दिन हुए आतंकवादी हमले के बाद शुरू की गई थी।
एनआईए ने बताया कि दोषी पाए गए युवक श्रीलंका के अनवर-अल-अवलाकी, अबू बारा, मूसा सेरानटोनियो, जहरान हाशिम जैसे कट्टरपंथी नेताओं के भाषण देखते थे और उन्हें सोशल मीडिया के जरिए प्रसारित करते थे। दोनों ने साल 2017 से लेकर 2019 तक आईएसआईएस की कट्टरपंथी विचारधारा को बढ़ावा दिया। साल 2017 में दोनों युवक केरल कई बार गए और वहां विभिन्न लोगों से मिले। दोनों साल 2022 के कोयंबटूर बम विस्फोट मामले में भी आरोपी हैं।