राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने तथाकथित इस्लामिक स्टेट (आईएश) के एक मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है और इसके दो कथित गुर्गों, अहमद अब्दुल कैडर (40) और इरफान नासिर (33) को बुधवार को बंगलूरू से गिरफ्तार किया है। एजेंसी ने बताया कि 2013-14 में कम से कम 13-14 लोग बंगलूरू से इराक और सीरिया गए थे। माना जाता है कि उनमें से दो आईएस के लिए लड़ते हुए सीरिया में मारे गए थे, जबकि कुछ 2014 में चुपचाप लौट आए। इनमें से कई अभी भी फरार हैं।
आईएस ने 2014 में इराक और सीरिया पर हमला किया। इराक ने 2017 में आतंकवादी समूह पर जीत की घोषणा की। मार्च 2019 में, सीरिया में अमेरिकी समर्थित बलों ने एलान किया कि उन्होंने सीरिया में आतंकी समूह को हरा दिया है और समूह के क्षेत्रीय नियंत्रण को समाप्त कर दिया है।
एजेंसी ने कहा कि एनआईए ने मॉड्यूल के सभी सदस्यों की पहचान कर ली है और उन लोगों के बारे में जानने के लिए जांच की जा रही है, जो उनकी गतिविधियों के संपर्क में थे। उन्होंने कहा कि आईएस मॉड्यूल से बंगलूरू लौटने वालों का जीवन से मोहभंग हो गया था, आईएस ने वादा किया था कि उसकी गतिविधियों में कुछ भी इस्लामिक नहीं है।
गिरफ्तार अब्दुल कैडर एक बैंक में काम करता है, वह एक व्यापार विश्लेषक है और नासिर अपने परिवार के व्यवसाय को चलाता है। दोनों पर आरोप है कि कथित तौर पर मॉड्यूल के अधिकांश सदस्यों को कट्टरपंथी बनाया और कम से कम उसके पांच सदस्यों की यात्रा के लिए धन की व्यवस्था की।
एक बड़ा 22 सदस्यीय मॉड्यूल 2016 में केरल के कासरगोड और पलक्कड़ जिले से इराक और सीरिया की यात्रा पर गया था। यह भारत से इस क्षेत्र की यात्रा करने वाला सबसे बड़ा समूह माना जाता है।
अधिकारियों ने कहा कि कई गुर्गों ने 2014 में छोटे समूहों या व्यक्तिगत रूप से इराक, सीरिया और अफगानिस्तान में आईएस के कब्जे वाले इलाकों की यात्रा की है। नाम न छापने की शर्त पर एक अधिकारी ने कहा कि 'केरल का कासरगोड मॉड्यूल सबसे बड़ा मॉड्यूल था और उसके बाद अब यह बंगलूरू मॉड्यूल है जिसमें 13-14 लोग शामिल हैं।
अधिकारियों ने कहा कि एजेंसी को बंगलूरू मॉड्यूल के बारे में पता तब चला जब अगस्त में एक चिकित्सक अब्दुल रहमान को बंगलूरू में गिरफ्तार किया गया था। अब्दुल रहमान को जहांजानीब सामी और हिना बशीर बेग से जुड़े होने के मामले गिरफ्तार किया गया था। इस जोड़े को आईएस के कथित संबंधों के लिए गिरफ्तार किया गया था।
उन्होंने जांच के दौरान बताया कि अब्दुल कैडर, नासिर और उनके कुछ सहयोगी हिज्ब उत-तहरीर (हूट) के सदस्य थे और बाद में कुरान सर्कल नाम का एक समूह बनाया और बंगलूरू में आमलोगों को कट्टरपंथी बनाया। उन्होंने कथित तौर पर धन एकत्र किया और आईएस की सहायता करने और अपनी विचारधारा और गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए सीरिया की अपनी यात्राओं को वित्त पोषित किया।