आयोग के सूत्रों का कहना है कि इन सिफारिशों को भेजने के पीछे मुख्य वजह महिलाओं को सशक्त बनाना और मौजूदा कानूनी ढांचे की कमियों को दूर करना है। उनका कहना है कि लड़कों और लड़कियों की शादी की कानूनन उम्र सालों पहले तय की गई थी।
लड़कियों की उम्र कम रखने के पीछे यह विचार था कि लड़कों के मुकाबले लड़कियां जल्दी जवान होती हैं। लेकिन आज के वक्त में यह अवधारणा ही बेमानी है। उन्होंने बताया कि साल 2008 में भी विधि आयोग ने सरकार से शादी के लिए लड़के-लड़की की कानूनन उम्र 18 साल करने की सिफारिश की थी।