ओडिशा में इन दिनों राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने डायनगिरी, जादू-टोना, टोना-टोटका बंद करने के लिए अभियान चला रखा है। इसके सभी 30 जिला कलेक्टरों, राज्य मुख्य सचिव और डीजीपी को पत्र लिखा जा चुका है।
इसके मद्देनजर एनएचआरसी ने अपने हालिया आदेश में प्रदेश के मुख्य सचिव, डीजीपी, जिला कलेक्टरों से इसके रोकथाम की व्यापक रिपोर्ट मांगी है। साथ ही जादू-टोना, टोना-टोटका जैसी सामाजिक कुरीतियों और डायन-शिकार पीड़ितों को मुआवजा दिलाने का निर्देश भी जारी किया गया है।
नागरिक अधिकार वक्ता, प्रसिद्ध मानवाधिकार कार्यकर्ता और सुप्रीम कोर्ट के वकील राधाकांत त्रिपाठी द्वारा दायर एक याचिका पर हाल ही में एक नया निर्देश जारी करते हुए एनएचआरसी ने आदेश पारित किया है।
याचिका में ओडिशा में साल भर के आंकड़े के अनुसार त्रिपाठी ने कहा कि यह सामाजिक कुरीतियां एनएचआरसी, एनसीडब्ल्यू और अन्य मंचों के हस्तक्षेप के बाद भी जारी है। इससे पहले एनएचआरसी ने मुख्य सचिव से कहा था और सभी जिलाधिकारियों को ग्राम पंचायतों के निर्वाचित वार्ड सदस्य की भागीदारी के माध्यम से ग्राम स्तर पर चुड़ैल शिकार अधिनियम, 2013 की रोकथाम के कार्यान्वयन के लिए कार्रवाई करने का निर्देश दिया था।
एनएचआरसी ने मान्यता प्राप्त गैर सरकारी संगठनों की सहायता से स्कूलों में प्रभावी जागरूकता अभियान चलाकर और पीड़ितों या पीड़ित परिवार के सदस्यों को मौद्रिक मुआवजा प्रदान करने को कहा था।
एनएचआरसी ने अपने आदेश में कहा, ‘अधिवक्ता और मानवाधिकार कार्यकर्ता त्रिपाठी ने जादू टोना के संदेह में लोगों की हत्या और हत्या के लिए आयोग के साथ एक बहुत ही गंभीर मुद्दा उठाया था। शिकायतकर्ता ने ओडिशा में जादू टोना के नाम पर ग्रामीणों के खिलाफ किए गए अत्याचारों और मानवाधिकारों के उल्लंघन के लिए खिलाफ वर्ष 2019 में 07 पन्नों की शिकायत दर्ज कराई थी।’
त्रिपाठी ने कहा कि पुलिस अधीक्षक मलकानगिरी ने स्वीकार किया कि आदिवासी लोगों की काला जादू और जादू टोना प्रथा में गहरी आस्था है। इसी तरह, सुंदरगढ़ के पुलिस अधीक्षक ने भी इस तरह की प्रथा की व्यापकता को स्वीकार किया है ।
त्रिपाठी ने अपने प्रत्युत्तर में दोहराया कि राज्य की एजेंसियों ने अभी तक जांच और जांच में तेजी नहीं लायी है, जो कि प्रिवेंशन ऑफ विच हंटिंग एक्ट, 2013 के तहत है। उन्होंने कहा कि राज्य एनएचआरसी के पहले के निर्देश का पालन करने में भी विफल रहा है ।