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चेतावनी: तालिबानियों से प्रेरित पाक आतंकी आकाओं पर ही पड़ सकते हैं भारी

Fri, 11 Jun 2021 04:50 AM IST
Jeet Kumar एजेंसी, नई दिल्ली।

सार

थरूर ने अफगानिस्तान में सोवियत संघ की हार में पाकिस्तान और अमेरिकी गठजोड़ से लेकर ओसामा बिन लादेन के वर्ल्ड ट्रेड टॉवर पर हमले से बदले हालात तक का ब्योरा अपने लेख में दिया है।
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शशि थरूर (फाइल फोटो) - फोटो : Instagram
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विस्तार
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वरिष्ठ कांग्रेसी सांसद शशि थरूर ने चेतावनी दी है कि अफगानिस्तान में अपने तालिबानी भाइयों की सफलता से उत्साहित होकर पाकिस्तानी आतंकी समूह इस्लामाबाद में अपने पालनहारों के ही खिलाफ हो सकते हैं।

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राजनयिक से नेता बने थरूर ने जापान टाइम्स में लिखे लेख में कहा, आईएसआई आतंकवादी समूहों को तैयार करना और उनकी मदद करने से पैदा होने वाला समस्या को जानती है। आईएसआई को पता है कि ऐसे संगठन हमेशा उसके नियंत्रण में नहीं रहने वाले हैं।

थरूर के मुताबिक, अब अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के अफगानिस्तान से अपने सभी सैनिक सितंबर तक बुलाने की घोषणा ने सबकुछ बदल दिया है। अपना कोई भी दीर्घकालिक लक्ष्य हासिल किए बिना अमेरिका का वापस लौटना उसकी हार है, जिसने तालिबान को और ज्यादा शक्तिशाली और काबुल पर कब्जे का दावेदार बना दिया है।
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थरूर ने चेताया है कि अफगानिस्तान में तालिबान की सफलता से पाकिस्तान में मौजूद कट्टरपंथी समूहों, खासतौर पर पाकिस्तानी तालिबान को हौसला मिलेगा, जो पहले ही इस्लामाबाद में आतंकी इस्लाम लागू करने के लिए हमले करता रहा है।

उन्होंने कहा, आईएसआई को कोई शक नहीं है कि एक बार अमेरिकी सेना वापस चली गई और अफगान तालिबान काबुल में सुरक्षित काबिज हो गए तो वे पाकिस्तानी तालिबान की हरकतों को माफ कर सकते हैं और आईएसआई के अमेरिकी मदद करने को भुला सकते हैं। ऐसा हुआ तो अफगानिस्तान पर आईएसआई का नियंत्रण हो जाएगा और पाकिस्तानी तालिबान के हमले थम जाएंगे। तब आईएसआई पाकिस्तानी तालिबान का उपयोग अपने ‘असल दुश्मन’ भारत के खिलाफ कर सकती है।

उलटी पड़ी चाल तो पाक होगा बरबाद
थरूर का यह भी कहना है कि यह भी हो सकता है अफगानिस्तान में तालिबान को मिली सफलता जैसा परिणाम पाने के लिए पाकिस्तानी आतंकी समूह ज्यादा आक्रामक होकर पाकिस्तान में ही हमले करने लगें।

उन्होंने कहा, आतंकी समूह सवाल उठा सकते हैं कि यदि अफगानिस्तान एक इस्लामी अमीरात के तौर पर चलाया जा सकता है तो पाकिस्तान क्यों नहीं? जब हम अपने निर्णय ले सकते हैं तो आईएसआई की धुन पर क्यों नाचा जाए?

उन्होंने कहा, यह सच है कि पाकिस्तान तालिबान को अपने अफगान समकक्ष के बराबर सफलता मिलने की संभावना कम है, लेकिन वह पाकिस्तान को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसा हुआ तो पाकिस्तानी जनता का अपने देश में सैन्य प्रभुत्व मोहभंग तेज हो सकता है।

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