राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस एक शिकायत मिलने के बाद जारी किया गया, जिसमें कई सार्वजनिक बसों के डिजाइन में एक गंभीर खामी होने का आरोप लगाया गया है, जिससे यात्रियों के जीवन को खतरा पैदा हो रहा है।
शिकायत में हाल के दिनों की उन घटनाओं का जिक्र किया गया है, जिनमें यात्रियों से भरी बसों में आग लग गई, जिससे लोगों की मौत हुई, जिन्हें रोका जा सकता था। शिकायतकर्ता का कहना है कि सार्वजनिक परिवहन की बसों के डिजाइन में बार-बार होने वाली और गंभीर खामी से यात्रियों के जीवन के लिए खतरा है। खासतौर पर कुछ बसों में चालक का केबिन पूरी तरह से यात्री हिस्से से अलग होता है, जिससे आग लगने या आपात स्थिति में समय पर पता लगाने और संचार करने में समस्या आती है।
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शिकायत में कहा गया कि यह संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का खौफनाक उल्लंघन है और वाहन निर्माता और मंजूरी देने वाले अधिकारियों की कथित प्रणालीगत लापरवाही को उजागर करता है। शिकायत में आग्रह किया गया कि तुरंत कदम उठाए जाएं ताकि बसों के डिजाइन में सुधार हो और जिम्मेदारी तय की जाए और प्रभावित लोगों और परिवारों को मुआवजा सुनिश्चित किया जा सके।
एनएचआरसी की एक पीठ ने 1993 के मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम की धारा 12 के तहत मामले को संज्ञान में लिया। इस पीठ का नेतृत्व सदस्य प्रियांक कानूनगो कर रहे थे। आदेश में कहा गया कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव और महाराष्ट्र के पुणे स्थित केंद्रीय सड़क परिवहन संस्थान के निदेशक को नोटिस जारी किया जाए। उन्हें निर्देश दिए गए हैं कि शिकायत में उठाए गए मुद्दों की जांच की जाए और दो सप्ताह के भीतर कार्रवाई की रिपोर्ट आयोग को सौंपी जाए।