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NHRC Notice: नागपुर में चार बच्चों को चढ़ाया एचआईवी युक्त खून, मुंगेर में अवैध अस्पतालों की भरमार, जारी हुआ नोटिस

Fri, 27 May 2022 09:09 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

बयान में कहा गया है कि एनएचआरसी ने महाराष्ट्र के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर मामले में छह सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
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NHRC Notice - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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एनएचआरसी ने नागपुर में खून चढ़ाने के बाद चार बच्चों के एचआईवी पॉजिटिव होने और उनमें से एक की मौत की रिपोर्ट पर महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी किया है। अधिकारियों ने कहा कि राज्य सरकार के खाद्य एवं औषधि विभाग के सचिव को इस मामले में प्रारंभिक जांच और आपराधिक कार्यवाही शुरू करने के संबंध में छह सप्ताह के भीतर एक रिपोर्ट देने के लिए भी एक नोटिस जारी किया गया है। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, चार बच्चों का थैलेसीमिया का इलाज किया जा रहा था, जिसमें पहले न्यूक्लिक एसिड टेस्ट के माध्यम से रक्त चढ़ाने के लिए रक्त की जांच की जाती है। हालांकि सुविधा के अभाव में बच्चों को दूषित खून चढ़ा दिया गया।  

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आयोग ने कहा कि उसने मीडिया रिपोर्ट का स्वत: संज्ञान लिया है। यह देखा गया कि मीडिया रिपोर्ट की सामग्री यदि सही है, तो पीड़ितों के मानवाधिकारों का उल्लंघन है। बयान में कहा गया है कि एनएचआरसी ने महाराष्ट्र के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर मामले में छह सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट में दोषी पाए जाने पर दोषी लोक सेवकों / अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई या प्रस्तावित की जाने वाली कार्रवाई शामिल होने की उम्मीद है। उनसे यह भी रिपोर्ट करने के लिए कहा गया है कि क्या पीड़ित परिवारों को कोई अंतरिम मुआवजा दिया जाएगा।  

मुंगेर जिले में चल रहे अवैध अस्पतालों पर नोटिस 
वहीं, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने बिहार के मुंगेर जिले में बिना अनिवार्य पंजीकरण के बड़ी संख्या में चल रही स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर केंद्र और बिहार सरकार को नोटिस जारी किया है। 2013 में राज्य सरकार द्वारा पारित विशिष्ट कानून के बावजूद बिहार के मुंगेर जिले में बड़ी संख्या में अस्पताल, क्लीनिक और नर्सिंग होम बिना किसी पंजीकरण के अवैध रूप से चल रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट पर स्वत: संज्ञान लेते हुए पैनल ने विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।   कथित तौर पर जिले में चल रहे 40 निजी अस्पतालों में से केवल चार ही कानूनी रूप से पंजीकृत हैं। 
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आयोग ने पाया है कि मीडिया रिपोर्ट की सामग्री यदि सही है, तो मानवाधिकारों का उल्लंघन है। इसने बिहार सरकार के मुख्य सचिव, केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय सचिव और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अध्यक्ष को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है, जिसमें क्षेत्र में अवैध रूप से चल रहे चिकित्सा संस्थानों के खिलाफ उठाए गए कदमों का प्रस्ताव शामिल है।

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