राष्ट्रीय माननाधिकार आयोग ने केंद्र और राज्य सरकारों को ऑक्यूलर ट्रॉमा (आंखों की बीमारी) के प्रसार को रोकने और रोगियों के इलाज और उनके पुनर्वास के लिए को सुनिश्चित करने के लिए सलाह दी है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने ऑक्यूलर ट्रॉमा के प्रसार को रोकने के लिए कई अन्य सिफारिशें भी की हैं। इन सिफारिशों में इसके पीड़ितों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए एक विशेष कोष की स्थापना भी शामिल है।
गौरतलब है कि न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) अरुण कुमार मिश्रा की अध्यक्षता में गठित NHRC की समिति ने केंद्र सरकार ओर राज्यों के साथ ही केंद्र शासित प्रदेशों को ऑक्यूलर ट्रॉमा के प्रभाव को रोकने और उसके प्रसार को कम करने के साथ ही इसके उचित मानकीकृत उपचार की सिफारिश की है। इसके अलावा ऑक्यूलर ट्रॉमा के पीड़ितों के पुनर्वास को सुनिश्चित करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को सलाह दी है। एनएचआरसी ने अपने बयान में बताया है कि ऑक्यूलर ट्रॉमा आंखों की बीमारी से ग्रस्त लगभग पांच प्रतिशत मरीजों में स्थायी अंधापन का कारण बनता है।
आयोग ने अपनी कई महत्वपूर्ण सिफारिशों के साथ ही सरकारों से ऐसे उद्योंगो, जहां ऑक्यूलर ट्रॉमा के साथ ही अन्य औद्योगिक दुर्घटनाएं ज्यादातर होती हों, की पहचान करने के साथ ही उन फैक्ट्रियों या इकाइयों जहां 50 या उससे ज्यादा श्रमिक काम करते हों, के लिए मालिकों के लिए न्यूनतम व्यक्तिगत दुर्घटना कवर खरीदना अनिवार्य बनाने को कहा है। इसके तहत उन इकाइयों में काम करने वाले प्रत्येक श्रमिक के लिए 15 लाख रुपये की राशि किसी दुर्घटना की स्थिति में दी जाएगी।
आयोग ने यह भी बताया है कि आंखों की चोट (ऑक्यूलर ट्रॉमा) के प्रमुख सड़क दुर्घटनाएं (34 प्रतिशत), खेल (29 प्रतिशत) और फैक्ट्रियां (21 प्रतिशत) हैं।