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पर्यावरण के लिए कड़ी चुनौतियां पेश करेगा 2017, सरकारों से बड़े एक्शन की उम्मीद

Mon, 26 Dec 2016 05:44 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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न ऑड काम आया और न ईवेन। तमाम कवायदों के बीच दिल्ली समेत एनसीआर की हवा भी बद से बदतर होती गई। ठीक, जीवनदायिनी नदियों और आद्रभूमि (वेटलैंड) की तरह। वर्ष 2016 में वायु गुणवत्ता इस कदर बदतर हुई कि पहली बार प्रवासी मजदूरों को बेबस होकर दिल्ली-एनसीआर से लौट जाना पड़ा। 
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सिर्फ मजदूर ही नहीं कई मध्यमवर्गीय परिवार भी साफ हवा और पानी की चाहत में अपने घर वापस लौट गए। इस बीच केंद्र और राज्य के बीच चलने वाली लड़ाई बानगी भर है। प्राधिकरणों की आपसी अंतर्कलह ने भी इस दिशा में कोई काम ठोस तरीके से नहीं किया। वर्ष बीतना तो दूर छोड़िए स्थिति दिन-ब-दिन बद से बदतर हो रही है।
 
प्रदूषण से निपटने के लिए सिर्फ सरकारें ही नहीं बल्कि अपनी-अपनी जिम्मेदारी हर इंसान को उठानी होगी। उम्मीद है कि नए वर्ष 2017 में कुछ नए प्रतिबंध, रोक, नियम, कानून के बीच साफ हवा और पानी के लिए मिलकर सार्थक प्रयास होंगे -
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दिल्ली में नए वर्ष 2017 का आगाज भी एक नए नियम के साथ होने जा रहा है। यह नया नियम कुछ और नहीं बल्कि एक प्रतिबंध है। एनजीटी ने ठोस कचरे व प्लास्टिक से पैदा होने वाले वायु प्रदूषण पर रोकथाम लगाने के लिए पूरी दिल्ली में 1 जनवरी से डिस्पोजल प्लास्टिक उत्पादों जैसे तश्तरी, गिलास, चम्मच, कटोरी इत्यादि पर पूरी तरह रोक लगाने का आदेश दे चुका है। 
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वायु गुणवत्ता लाल निशान के परे आपात स्थिति को भी पार कर गई

वहीं भारी पॉलीथीन पर रोक पहले से ही है। इस रोक के बाद उम्मीदें हैं कि कुछ फीसदी ही सही वायु प्रदूषण के कारकों का निवारण शुरू होगा। वहीं केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के जरिए दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता ठीक करने के लिए दिया गया एक्शन प्लान भी नए वर्ष में लागू करना एक बड़ी चुनौती होगी। इस एक्शन प्लान के तहत सरकारों को सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को ठीक करने के साथ सड़क, ट्रैफिक, जाम, ध्वनि प्रदूषण इत्यादि व्यवस्थाओं को दुरुस्त करना होगा।

आपको याद होगा 2016 के मध्य में दिल्ली के लिए एक सुकून देने वाली खबर विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से आई, लेकिन खबर और उसके आंकड़ों पर भी सवाल उठ गए। 

डब्ल्यूएचओ ने विश्व के शीर्ष दस प्रदूषित शहरों की सूची में ग्वालियर, इलाहाबाद, पटना और रायपुर को शामिल करते हुए दिल्ली को बाहर कर दिया। इस रिपोर्ट पर जो सवाल और शंका जाहिर की गई थी, वह सच साबित हुई। ठंड की दस्तक के साथ ही अक्तूबर में दीपावली के दौरान दिल्ली-एनसीआर में जबरदस्त धुंध की चादर फैल गई। 

वायु गुणवत्ता लाल निशान के परे आपात स्थिति को भी पार कर गई। यह संकेत मात्र था कि अदालत से लेकर नगर पालिकाओं तक समस्या से निपटने के लिए आदेश, निर्देश और अधिसूचनाएं जारी होने लगी। कुछ कदम उठाए गए तो कुछ आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला। दिल्ली में हवा लाल-निशान पर कायम रही। वर्ष जाने को है, स्थिति अब भी संभली नहीं है।

10 साल पुराने डीजल वाहनों को हटाने के लिए लगातार आदेश देता रहा है एनजीटी

- एनजीटी दिल्ली-एनसीआर में 10 साल पुराने डीजल वाहनों को हटाने के लिए लगातार आदेश देता रहा। वहीं कई याचिकाएं राहत देने के लिए मांग करती रहीं। एनजीटी सभी को इनकार करता रहा। वहीं प्रदूषण फैलाने वाले पुराने सरकारी डीजल वाहनों पर भी एनजीटी ने सख्ती बरती।

- आर्ट ऑफ लिविंग के जरिये यमुना डूब क्षेत्र में किया गया कार्यक्रम काफी विवादों में रहा। पर्यावरणविद इसे आदेश का उल्लंघन मानकर एनजीटी से भारी जुर्माने की मांग करते रहे। वहीं एओएल को शुरुआती पांच करोड़ रुपये की पर्यावरणीय क्षति चुकानी पड़ी है। यह केस एनजीटी में लंबित है। एक्सपर्ट कमेटी की रिपोर्ट के बाद अब फैसला आना है।

- दिल्ली-एनसीआर में ठोस कचरे का वैज्ञानिक तरीके से संग्रहण, छंटाई और निपटारा न होने पर एनजीटी ने चिंता जाहिर की। वहीं अपने हालिया आदेश में पूरे देश में कूड़ा-कचरा जलाए जाने पर प्रतिबंध लगाने का आदेश सुनाया है। इसके अलावा आदेश का उल्लंघन करने वालों पर 5 हजार रुपये से 25 हजार रुपये तक जुर्माना भी लगाने को कहा है।

- निर्माण के जरिये होने वाले वायु प्रदूषण पर रोक लगाई गई। एनजीटी के जरिए आपात स्थिति में एक हफ्ते तक निर्माण पर भी रोक लगी। वहीं निर्माण के दौरान प्रदूषण फैलाने वाले करीब 1400 का पूर्वी दिल्ली नगर निगम के जरिए 50 हजार रुपए का चालान काटा। इन्हें हाल ही में एनजीटी ने नोटिस भी दिया है।

- एनजीटी ने गंगा की यमुना की सफाई के लिए प्राधिकरणों के काम-काज पर रोक लगाई। गलत तरीके से निविदाएं जारी करने और फंड खर्चा करने पर एनजीटी ने यह आदेश दिया था।
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प्रदुषण को रोकने के लिए ये हैं उम्मीदें 

ये हैं उम्मीदें 

- 1 जनवरी, 2017 से दिल्ली में डिस्पोजल प्लास्टिक पर सख्ती के साथ रोक लगाई जाएगी। ऐसे में ठोस कचरे में डिस्पोजल प्लास्टिक का बोझ कम होगा।

- दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषित हवा में मौजूद खतरनाक पीएम 2.5 और पीएम 10 के स्तर को नियंत्रित करने के लिए एक्शन प्लान पर काम किया जाना है।

- 10 साल से ज्यादा पुराने डीजल वाहनों को चरणबद्ध तरीके से सभी सरकारी विभागों से हटाया जाना है। इसके अलावा पुराने डीजल वाहनों को हटाने पर प्रोत्साहन दिए जाने के संबंध में नई स्क्रैप नीति भी आ सकती है।

- जल प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए औद्योगिक और घरेलू अपशिष्ट की निकासी पर और सख्ती व शोधन यंत्रों की संख्या बढ़ाई जा सकती है।

- बड़ी परियोजनाओं और अन्य कार्यों के लिए भू-जल इस्तेमाल के बजाए शोधन यंत्रों के पानी का इस्तेमाल करना होगा। मसलन मेट्रो ट्रेन की धुलाई के लिए भी यह तरीका अपनाया जाना है।

- गंगा के लिए यमुना पर भी एनजीटी के जरिए बड़ा फैसला सुनाया जा सकता है।

- पर्यावरण मंत्रालय भी दिल्ली-एनसीआर में एक्शन प्लान लागू करने के लिए वायु प्रदूषण को लेकर राज्य के साथ बैठक कर सकता है।
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