नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने गोवर्धन परिक्रमा मार्ग के संरक्षण को लेकर दिए गए 17 बिंदुओं वाले आदेश के अनुपालना की ताजा रिपोर्ट यूपी सरकार और मथुरा प्राधिकरण से तलब की है। ट्रिब्यूनल का यह आदेश कोर्ट कमिश्नर की रिपोर्ट के बाद आया है। कोर्ट कमिश्नर ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि मथुरा में आदेशों की अनुपालना को लेकर स्थानीय प्राधिकरण गंभीर हैं लेकिन समयबद्ध और योजनाबद्ध तरीके से आदेशों का अनुपालन नहीं किया गया तो सारी कवायद पर पानी फिर जाएगा।
जस्टिस आरएस राठौर की अध्यक्षता वाली पीठ ने बृहस्पतिवार को इस मामले पर सुनवाई की। वहीं, पीठ ने राजस्थान के हिस्से में बनाए जा रहे स्वागत द्वार के कारण कच्चे परिक्रमा मार्ग पर अतिक्रमण को लेकर प्राधिकरण को कड़ी फटकार लगाई है। पीठ ने स्थानीय प्राधिकरण को तत्काल अतिक्रमण हटाने का आदेश भी दिया है। पीठ ने कहा कि आदेश के विरुद्ध स्वागत मार्ग क्यों बनाया गया? अगली सुनवाई एक फरवरी को होगी। यूपी के साथ राजस्थान के लोक निर्माण विभाग के अधिकारी और संबंधित अभियंता ट्रिब्यूनल में पेश होकर जवाब देंगे।
कोर्ट कमिश्नर ने पीठ थपथपाकर गिनाईं यह कमियां
मानसी गंगा के किनारे जल शोधन संयंत्र बीते चार-पांच वर्षो से काम नहीं कर रहा है। इसकी वजह भी किसी को नहीं मालूम। नगर पंचायत इसे लेकर चिंतित नहीं है। कच्ची परिक्रमा के चौड़ीकरण को लेकर अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है। सीवेज, कूड़ा-कचरा और साफ-सफाई को लेकर ठोस योजना की जरूरत है। कोर्ट कमिश्नर ने पार्किंग में सुधार की भी जरूरत बताई।