राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने सुझाव दिया है कि उत्तर प्रदेश में सुर सरोवर पक्षी विहार की सीमा को उचित तरीके से सीमांकित किया जाना चाहिए। यदि पक्षी विहार के अंदर अवैध निर्माण मिले तो उसे हटाना चाहिए।
एनजीटी ने यह सुझाव उमाशंकर पटवा की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिकाकर्ता ने आगरा स्थित पक्षी विहार में हिंदुस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट और आनंद इंजीनियरिंग कॉलेज के निर्माण पर सवाल उठाए हैं।
एनजीटी के अध्यक्ष जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की पीठ ने 18 सितंबर के फैसले में पाया कि निर्माण 1991 की अधिसूचना के बाद हुए। ऐसे में या तो स्पष्ट किया जाना चाहिए कि क्षेत्र पक्षी विहार का हिस्सा है और ऐसे मामले में, सभी निर्माण हटाने चाहिए। या फिर पक्षी विहार की सीमा का उचित ढंग से सीमांकन होना चाहिए।
पीठ ने निर्देश दिया कि ये प्रक्रिया उत्तर प्रदेश के पक्षी विहार के मुख्य वार्डन की संयुक्त समिति, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के नेशनल बोर्ड फार वाइल्ड लाइफ और वन विभाग के नामित व्यक्तियों द्वारा किया जाना चाहिए। समन्वय और अनुपालन के लिए नोडल एजेंसी नेशनल बोर्ड फार वाइल्डलाइफ का प्रतिनिधि होगा।
पीठ ने यह भी कहा कि समिति की पहली बैठक एक महीने के अंदर होनी चाहिए। यह बैठक ऑनलाइन या फिर शारीरिक रूप से हो सकती है और समिति की सभी आवश्यकताओं की पूर्ति उत्तर प्रदेश सरकार करेगी। साथ ही समिति को अपनी रिपोर्ट देने को कहा। इसके साथ ही मामले की सुनवाई अगले साल 10 फरवरी तक स्थगित कर दी।