कोरोना से जुड़े कचरे को दूसरे कचरों से अलग करना समय की जरूरत है। नेशनल ग्रीन टिब्यूनल (एनजीटी) ने मंगलवार को कहा कि जन स्वास्थ्य और पर्यावरण के हित को देखते हुए ये कदम उठाना जरूरी है।
एनजीटी के अध्यक्ष जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की बेंच ने कहा कि देश में रोज लगभग 101 मीट्रिक टन बायोमेडिकल कचरा तैयार हो रहा है। वैज्ञानिक ढंग से इस कचरे का निस्तारण जरूरी है। देशभर में 609 मीट्रिक टन अस्पताली कचरा हर दिन बनता है, जो महामारी से बन रहे अस्पताली कचरे से अलग है।
अस्पताली कचरे के प्रबंधन से जुड़ी 195 कंपनियां सामान्य अस्पताली कचरे के साथ कोरोना से जुड़े कचरे का निस्तारण कर रही हैं, जो घातक हो सकता है। एनजीटी को राज्यों के प्रदूषण बोर्ड द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार 2,907 अस्पताल, 20,707 क्वारंटीन केंद्र, 1539 सैंपल कलेक्शन सेंटर और 264 लैबोरेटरी में जांच हो रही है। इन सभी सेंटरों से महामारी से जुड़ा कचरा उत्पन्न हो रहा है।
जहां इनसीनरेटर नहीं वहां गहराई में दबाया जाए कचरा
बेंच में शामिल न्यायाधीश एसपी वांगड़ी ने कहा कि प्रदेशों में मुख्य सचिव, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, स्वास्थ्य विभाग के साथ केंद्रीय स्तर और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के बीच समन्वय जरूरी है। एनजीटी ने ये भी कहा कि जहां तक अस्पताली कचरा इंसीनरेटर में नहीं निस्तारित हो पा रहा है, वहां गहराई में उसे दबाया जाए।