पहाड़ी क्षेत्रों के जंगलों में सालाना आग लगती है और इसके बाद जंगल बचाने को लेकर शोर मचता है। पहले से न ही जंगलों के बचाव को लेकर राज्य गंभीर हैं और न हीं केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को उदासीनता के लिए कड़ी फटकार लगाई है।
प्रधान पीठ ने निर्देश में कहा है कि वे सभी राज्यों को ई-मेल कर अगले हफ्ते तक आपदा प्रबंध योजना दाखिल करने के लिए कहें। इसके अलावा राज्यों के साथ बैठक कर मानकों के आधार पर उनकी आपदा प्रबंध योजनाओं को मंजूर करें। पीठ ने 10 फरवरी तक मंत्रालय को इस संबंध में बताने के लिए भी कहा है।
जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने शुक्रवार को मामले की सुनवाई की। इस दौरान वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के संबंधित अधिकारी भी प्रधान पीठ के समक्ष पेश हुए। उन्होंने जानकारी दी कि अब तक कुल 21 राज्यों की ओर से आपदा प्रबंध योजना मंत्रालय को भेजी गई है। जिसमें चार को मंजूर किया जा चुका है। इनमें उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश शामिल हैं। जबकि अन्य राज्यों और संघ शासित प्रदेशों की ओर से योजनाएं नहीं भेजी गई हैं।