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NGT की पर्यावरण मंत्रालय को फटकार, कहा- बिना योजना आग से कैसे बचेंगे जंगल

Sat, 28 Jan 2017 04:33 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली  
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पहाड़ी क्षेत्रों के जंगलों में सालाना आग लगती है और इसके बाद जंगल बचाने को लेकर शोर मचता है। पहले से न ही जंगलों के बचाव को लेकर राज्य गंभीर हैं और न हीं केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को उदासीनता के लिए कड़ी फटकार लगाई है।
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प्रधान पीठ ने निर्देश में कहा है कि वे सभी राज्यों को ई-मेल कर अगले हफ्ते तक आपदा प्रबंध योजना दाखिल करने के लिए कहें। इसके अलावा राज्यों के साथ बैठक कर मानकों के आधार पर उनकी आपदा प्रबंध योजनाओं को मंजूर करें। पीठ ने 10 फरवरी तक मंत्रालय को इस संबंध में बताने के लिए भी कहा है।
 
जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने शुक्रवार को मामले की सुनवाई की। इस दौरान वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के संबंधित अधिकारी भी प्रधान पीठ के समक्ष पेश हुए। उन्होंने जानकारी दी कि अब तक कुल 21 राज्यों की ओर से आपदा प्रबंध योजना मंत्रालय को भेजी गई है। जिसमें चार को मंजूर किया जा चुका है। इनमें उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश शामिल हैं। जबकि अन्य राज्यों और संघ शासित प्रदेशों की ओर से योजनाएं नहीं भेजी गई हैं। 
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योजनाओं का राष्ट्रीय आपदा प्रबंध गाइडलाइन के अनुरूप अवलोकन करें

- फोटो : अमर उजाला
वहीं, पीठ ने मंत्रालय से कहा कि जिन राज्यों की योजनाएं मंत्रालय तक पहुंच गई हैं बिना देरी के उन योजनाओं को राष्ट्रीय आपदा प्रबंध गाइडलाइन के अनुरूप अवलोकन कर मंजूर करें। इसके अलावा जिनमें खामियां हैं उन्हें भी बताएं।

इससे पहले याची की ओर से पेश एडवोकेट राजीव दत्ता ने कहा कि मंत्रालय ने सिर्फ खानापूर्ति के लिए चार राज्यों की योजनाओं को मंजूर कर दिया जबकि अन्य राज्यों की योजनाओं पर न ही गौर किया और न ही उनसे जुड़कर समस्या का समाधान किया। 

राज्यों की ओर से जो आपदा प्रबंध योजना भेजी जा रही हैं वह वैज्ञानिक तौर पर पुख्ता या प्रमाणित हैं या नहीं मंत्रालय इस बात की भी जांच नहीं कर रहा है। मामले में मंत्रालय को जल्द कदम बढ़ाने का निर्देश देने के बाद पीठ ने अगली सुनवाई मार्च में तय की है।   
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