राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने दिल्ली के सार्वजनिक पार्कों में सिंचाई आदि के लिए भूजल के इस्तेमाल की जांच करने का आदेश दिया है। एनजीटी अध्यक्ष जस्टिस एके गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण विभाग (सीपीसीबी) और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण विभाग (डीपीसीसी) के अधिकारियों इस मामले में दो महीने के अंदर ई-मेल पर रिपोर्ट मांगी है।
एनजीटी पीठ ने याचिकाकर्ता को भी इससे जुड़े दस्तावेजों का सेट सीपीसीबी और डीपीसीसी को सौंपने के बाद एक सप्ताह के अंदर शपथ पत्र जमा कराने का निर्देश दिया है। बता दें कि इससे पहले अधिकरण ने नागरिकों, डीडीए, दक्षिणी दिल्ली नगर परिषद और डीजेबी पर बागवानी के लिए ताजे पानी के इस्तेमाल करने की रोक लगा दी थी।
अधिकरण ने यह आदेश सेवानिवृत्त रियल एडमिरल एपी रेवी की उस याचिका पर दिया था, जिसमें वसंत कुंज क्षेत्र में बागवानी व अन्य उपयोग के लिए सीवर के पानी को ट्रीटमेंट के बाद सप्लाई करने का निर्देश राज्य सरकार को देने का आग्रह किया था।
एनजीटी ने तलब की दिल्ली-आगरा हाइवे पर सीवर बहाव रोकने को हुए काम की रिपोर्ट
राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने मंगलवार को हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी कर दिल्ली आगरा हाइवे पर सीवर बहाव रोकने के लिए हुए काम की रिपोर्ट तलब की है। एनजीटी प्रमुख जस्टिस आदर्श गोयल की पीठ ने अस्थायी उपाय के रूप में सर्विस रोड के किनारे ग्राम पंचायत द्वारा कच्चा नाला बनाए जाने की रिपोर्ट का खंडन कर दिया।
पीठ ने कहा, उक्त रिपोर्ट से स्पष्ट है कि सिर्फ अस्थायी व्यवस्था की गई है लेकिन इस मामले में ठोस कदम उठाते हुए उचित उपचार किए जाने की जरूरत है। पीठ ने कहा, इस मामले में राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड आगे की कार्यवाही देखेगा और संबंधित विभागों के बीच समन्वय बनाते हुए अब तक हुए काम की रिपोर्ट अगली सुनवाई तक ईमेल पर सौंपनी होगी।