राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने कहा कि तेलंगाना में कालेश्वरम सिंचाई प्रोजेक्ट कानून का उल्लंघन कर पर्यावरणीय मंजूरी दी गई। एनजीटी ने इससे हुए नुकसान का आकलन करने और स्थिति बहाल करने के लिए आवश्यक कदमों का पता लगाने के लिहाज से समिति का गठन किया है। एनजीटी ने पर्यावरण व वन मंत्रालय को सात सदस्यीय विशेष समिति बनाने और राहत व पुनर्वास उपाय सुझाने को कहा है।
नुकसान का आकलन करने को बनाई सात सदस्यीय समिति
एनजीटी अध्यक्ष एके गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने मंगलवार को कहा, परियोजना प्रस्तावक का यह कहना पूरी तरह गलत है कि पर्यावरण मंजूरी मिलने से पहले प्रोजेक्ट का सिंचाई से कोई लेना देना नहीं था। हम प्रस्ताव के इस रुख को स्वीकार नहीं कर सकते कि प्राथमिक रूप से प्रोजेक्ट जल आपूर्ति और जल प्रबंधन के लिए है।
सिंचाई इसका पूरक या आकस्मिक हिस्सा है। इसलिए 2008 से 2017 तक प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन से पहले पर्यावरणीय मंजूरी आवश्यक नहीं थी। लिफ्ट सिंचाई परियोजना को कानूनी आवश्यकताओं का उल्लंघन कर पूर्व व्यापी प्रभाव से मंजूरी दी गई।
एनजीटी तेलंगाना निवासी मोहम्मद हयातुद्दीन की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिन्होंने बिना वैधानिक मंजूरियों के प्रोजेक्ट का काम शुरू करने का आरोप लगाया था। याचिका में वन्य क्षेत्रों में पेड़ों की कटाई, विस्फोट करने तथा सुरंगों की खुदाई जैसी गतिविधियों पर प्रतिबंध की मांग की गई थी।