नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने पूरे देश में खतरनाक चीनी मांझे पर प्रतिबंध लगा दिया है। प्रधान पीठ ने अपने फैसले में कहा है कि तत्काल प्रभाव से नाइलॉन या किसी भी सिंथेटिक मटेरियल से बना जो नष्ट न होने लायक (नॉन-बॉयोडिग्रेडेबल) हो उसके निर्माण, आयात, बिक्री और इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध होगा।
इन खतरनाक मांझों की वजह से जीवन और पर्यावरण दोनों को खतरा था। हर वर्ष देश के अलग-अलग हिस्सों से मांझे की वजह से भयावह हादसों की खबरें आती रहती हैं।
जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने पीपुल फॉर एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल (पेटा) के मामले में यह फैसला सुनाया है।
एनजीटी ने कहा है कि सभी राज्य व संघ शासित प्रदेशों के मुख्य सचिव तत्काल प्रभाव से खतरनाक नाइलॉन व सिंथेटिक मांझे के निर्माण , बिक्री, भंडारण, खरीद और इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध लगाएं। पीठ ने कहा कि संबंधित राज्य सरकार, मुख्य सचिव, जिलाधिकारी इस फैसले को लागू कराने के लिए जिम्मेदार होंगे। यदि कोई फैसले का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ उचित कानून के तहत कार्रवाई की जाए।
पीठ ने कहा कि कई त्योहारों में पतंग उड़ाना हमारे देश की परंपराओं में गहराई से शामिल है। लेकिन खतरनाक चीनी मांझों की वजह से कई पक्षियों, पशुओं और मनुष्य बुरी तरह घायल भी हो जाते हैं। इस तरह के हादसों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। इसलिए ट्रिब्यूनल को इस मामले में हस्तक्षेप की जरूरत पड़ी। पीठ ने कहा कि प्राधिकरण किसी भी प्रकार के सिंथेटिक युक्त या नाइलॉन मांझों का आयात न करें।
पीठ ने कहा कि पतंग उड़ाना एक खेल और मनोजरंजन की गतिविधि भी है लेकिन पतंग में इस्तेमाल नाइलॉन युक्त खतरनाक मांझे लुप्तप्राय पक्षियों के लिए भी खतरनाक साबित हो रहे हैं। इन मांझों से कटकर कई पक्षियों की मौत होती है। यह पर्यावरण की क्षति है।