नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से पूछा है कि अन्तर्देशीय जलमार्ग से जुड़ी परियोजनाओं के लिए पर्यावरण मंजूरी की जरूरत है या नहीं? क्या ऐसी परियोजनाओं के पर्यावरणीय प्रभाव का अध्ययन कराया जाना चाहिए? पीठ ने कहा कि इन सवालों पर पर्यावरण मंत्रालय शीघ्र से शीघ्र जवाब दे। यह मंत्रालय के लिए आखिरी मौका होगा। मामले पर 15 मार्च को सुनवाई की जाएगी।
जस्टिस आरएस राठौर की अध्यक्षता वाली पीठ ने याची डॉ भरत झुनझुनवाला के मामले में यह आदेश दिया है। उन्होंने अन्तर्देशीय जलमार्ग परियोजना को बिना पर्यावरण मंजूरी शुरु किए जाने को लेकर आपत्ति उठाई है। पीठ ने कहा कि बीते वर्ष एक नवंबर को अन्तर्देशीय जलमार्ग परियोजना से जुड़े इन सवालों का जवाब मांगा गया था।
इसके बाद केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने 25 फरवरी को भी जवाब देने के लिए मोहलत मांगी थी। अभी तक कोई जवाब मंत्रालय की ओर से दाखिल नहीं किया गया है। यह आख्रिरी मौका होगा कि मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ट्रिबयूनल में हलफनामा दाखिल कर यह बताएं कि अंन्तर्देशीय जलमार्ग परियोजना के लिए पर्यावरण मंजूरी की जरूरत है या नहीं।
गंगा नदी समेत यमुना में भी जलमार्ग परियोजना को शुरु किया जाना है। आरोप है कि इन जलमार्गों के निर्माण से न सिर्फ नदी का प्रवाह प्रभावित होगा बल्कि जलीय जीवों के लिए भी संकट खड़ा हो जाएगा।