राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने निर्माण परियोजनाओं के संबंध में केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की अधिसूचना पर रोक बढ़ा दी है। मंत्रालय ने पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) की शर्तों में संशोधन करते हुए 14 नवंबर, 2018 को नई अधिसूचना जारी की थी। जिसके मुताबिक, केंद्र सरकार ने 20,000 वर्ग मीटर से 50,000 वर्ग मीटर तक क्षेत्र पर भवन या निर्माण परियोजनाओं के संबंध में नगर पालिकाओं, विकास प्राधिकरणों और जिला पंचायतों सहित स्थानीय निकायों को पर्यावरण से संबंधित परिस्थितियों का अनुपालन सुनिश्चित करने की शक्ति प्रदान की थी।
इसके अलावा सरकार ने इन स्थानीय निकायों को 20,000 वर्ग मीटर से 1,50,000 वर्ग मीटर तक के क्षेत्र वाले औद्योगिक शेड, अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों के संबंध में भवन निर्माण की अनुमति और कब्जा प्रमाण पत्र देने की शक्ति भी प्रदान की थी। सरकार के इस आदेश को एनजीटी में चुनौती दी गई थी। जिसमें कहा गया था कि संशोधित ईआईए सतत विकास और एहतियाती सिद्धांतों के खिलाफ है, जिसमें राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (एसईआईएए) को मूल्यांकन की जिम्मेदारी नहीं दी गई है।
एनजीटी अध्यक्ष जस्टिस एके गोयल की पीठ ने कहा कि पर्यावरण मंत्रालय को नोटिस जारी करने के बाद ट्रिब्यूनल ने दिसंबर 2018 में अधिसूचना पर रोक लगा दी और आगे की कार्यवाही स्थगित कर दी गई, क्योंकि यह मामला दिल्ली हाईकोर्ट में भी विचाराधानी है।