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एनजीटी ने 6 राज्यों से कहा, वायु प्रदूषण पर कार्य योजना सौंपें या एक करोड़ का जुर्माना भरें

न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: अजय सिंह Updated Mon, 25 Mar 2019 09:23 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : PTI

वायु प्रदूषण पर छह राज्यों द्वारा अपने आदेश का पालन नहीं होने पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने इन राज्यों के मुख्य सचिवों को आदेश दिया है। एनजीटी ने कहा है कि या तो एक महीने में वायु प्रदूषण से लड़ने के लिए कार्य योजना तैयार कर सौंपें या फिर एक करोड़ रुपये का भुगतान करें। ये छह राज्य हैं, महाराष्ट्र, असम, पंजाब, झारखंड, उत्तराखंड और नागालैंड।



सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 31 दिसंबर 2018 तक केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) को 102 'नॉन अटेनमेंट' की सूची वाले शहरों के संबंध में योजनाएं प्रस्तुत करनी थीं, और इसे 31 जनवरी तक अनुमोदित किया जाना था।


हालांकि छह राज्यों ने अक्तूबर 2018 में आया एनजीटी का आदेश नहीं माना। कई बार राज्यों को याद भी दिलाया गया। 


केंद्र शासित प्रदेशों को वायु प्रदूषण से लड़ने के लिए कार्य योजना तैयार करने का आदेश दिया गया था। एनजीटी ने अपने आदेश में कहा था कि 102 शहरों में वायु की गुणवत्ता राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं है। साथ ही एनजीटी ने कहा था कि कार्य योजना बनाने में नाकाम रहने पर राज्यों के मुख्य सचिव और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासक व्यक्तिगत रूप से जवाबदेह होंगे। 


इन 102 शहरों की सूची में दिल्ली, मुंबई, पुणे, विशाखापटनम, बंगलूरू, गुवाहाटी, कोलकाता, इलाहाबाद, कानपुर, लखनऊ, जयपुर, जम्मू, पटियाला, जालंधर, लुधियाना, पटना और हैदराबाद का नाम भी शामिल है। 


एनजीटी एक्ट के तहत उसके आदेश का पालन ना करना धारा 26 के तहत दंडनीय अपराध है। धारा 26 के तहत आरोपी को तीन साल की जेल और 10 करोड़ रुपये का जुर्माना भरना पड़ता है। या फिर जेल और जुर्माना दोनों भी हो सकता है। 

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